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भारतीय संस्कृति में परिवार की अवधारणा व्यापक: राज्यपाल श्री पटेल

राज्यपाल अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष शास्त्रीय त्रि-दिवसीय संगोष्ठी में हुए शामिल

राज्यपाल श्री मंगु भाई पटेल ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में परिवार की अवधारणा व्यापक है। हमारी संस्कृति की संकल्पना में वसुधैव कुटुम्बकं सारी दुनिया को ही परिवार माना गया है। भाव यह है कि मिल-जुलकर परस्पर स्नेह और सहयोग के साथ रहना ही परिवार का आधार है।

राज्यपाल श्री पटेल आज केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर द्वारा तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष शास्त्रीय शोध संगोष्ठी में “वैवाहिक जीवन: समस्याएँ और समाधान” विषय पर हुए वेबिनार को राजभवन से संबोधित कर रहे थे।

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि परिवार का आधार वैवाहिक संबंध होते हैं। भारतीय समाज में दाम्पत्य जीवन में होने वाले उतार-चढ़ाव पति पत्नी और संतान के साथ समस्त परिजन को प्रभावित करते है। उन्होंने कहा आधुनिकता की अंधी दौड़ में आज परिवारों में तनाव, विवाद और विघटन के मामले निरंतर बढ़ रहे हैं। इसका कारण युवा पीढ़ी का भारतीय नैतिक जीवन मूल्यों के प्रति उदासीन होना है। उन्होंने कहा कि परिवार के लिए सदस्यों के बीच एक दूसरे के प्रति त्याग, बलिदान और कर्त्तव्य-बोध को भगवान श्रीराम, सीताजी, लक्ष्मणजी और उनकी पत्नी उर्मिलाजी के द्वारा समझा जा सकता है। सावित्री-सत्यवान के प्रसंग भी प्रेरणादायी हैं। उन्होंने कहा कि वैवाहिक जीवन के शुरू में लिए जाने वाले सात फेरे भी जीवन की शिक्षाओं की प्रतिबद्धता हैं। पहले चार में वर और बाद के तीन फेरों में वधू का आगे होना, वैवाहिक आदर्शों को बताता है।

सारस्वत उद्बोधन निदेशक केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय मुंबई परिसर प्रो. भारत भूषण मिश्र ने दिया। संगोष्ठी को कुलपति संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, विशिष्ट अतिथि आचार्य संस्कृत विभाग मौका मॉरिशस प्रो. जतिंद्र मोहन मिश्र ने भी संबोधित किया। आभार प्रदर्शन डॉ. डम्बरूधर पति ने माना।

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