मध्य प्रदेश

हाईकोर्ट ने कहा- उम्मीदवार के अधिकार से बड़ा लोगों के जीने का हक; नाथ-तोमर पर होगी FIR

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  • Madhya Pradesh Corona Guideline Violation; Gwalior High Court Orders To FIR Against Kamal Nath And Narendra Singh Tomar

भोपाल/नई दिल्ली6 मिनट पहले

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फोटो पोहरी विधानसभा क्षेत्र की है, जहां बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की सभा हुई। ज्यादातर लोगों के चेहरे पर मास्क नहीं था। सोशल डिस्टेंसिंग भी नहीं दिखी।

चुनावी रैलियों में मास्क-सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों की अनदेखी और भीड़ पर अदालत और चुनाव आयोग, दोनों ने सख्ती दिखाई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बेलगाम रैलियों के मद्देनजर कांग्रेस नेता कमलनाथ और भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने ऐसी रैलियों पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा- संविधान ने उम्मीदवार और मतदाता दोनों को अधिकार दिए हैं। उम्मीदवार को चुनाव प्रचार का अधिकार है, तो लोगों को जीने और स्वस्थ रहने का हक है। उम्मीदवार के अधिकार से बड़ा लोगों के स्वस्थ रहने का अधिकार है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आदेश में क्या कहा?

मध्यप्रदेश की ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने दतिया के भांडेर में कमलनाथ और ग्वालियर में नरेंद्र तोमर की रैली को अपने फैसले का आधार बनाया। इन रैलियों में कोरोना-19 की गाइडलाइन के उल्लंघन को लेकर एडवोकेट आशीष प्रताप सिंह ने याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने इसी पर फैसला सुनाया। ग्वालियर और दतिया कलेक्टर से दो दिन में रिपोर्ट भी मांगी है।

  • जस्टिस शील नागू और जस्टिस राजीव कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने आदेश में कहा- राजनीतिक दलों की वर्चुअल मीटिंग अगर नहीं हो पा रही है तो ही सभा और रैलियां हो सकेंगी। इसके लिए चुनाव आयोग की इजाजत लेनी होगी।
  • “संविधान ने उम्मीदवार और मतदाता दोनों को अधिकार दिए हैं। उम्मीदवार को चुनाव प्रचार का अधिकार है तो लोगों को जीने के साथ-साथ स्वस्थ रहने का अधिकार है। उम्मीदवार के अधिकार से बड़ा लोगों के स्वस्थ रहने का अधिकार है।”
  • “मौजूदा हालात में राजनेताओं को लोगों के लिए उदारता दिखानी चाहिए थी, लेकिन उनके व्यवहार से ऐसा नजर नहीं आ रहा। सभाओं में सुरक्षित शारीरिक दूरी का पालन नहीं हो रहा है।”
  • “पार्टियों को रैली और सभाओं के लिए इजाजत लेनी होगी। ये भी बताना होगा कि वर्चुअल सभा क्यों नहीं हो सकती है। कलेक्टर अगर जवाब से संतुष्ट होते हैं तो ऑर्डर पास करेंगे और मामला चुनाव आयोग को भेजा जाएगा। आयोग की मंजूरी के बाद ही सभाएं हो सकेंगी।”
  • “आयोग सभा में जितने लोगों को शामिल होने की मंजूरी देगा, उतने लोगों के मास्क व सैनिटाइजर पर होने वाले खर्च की दोगुनी राशि कैंडिडेट को कलेक्ट्रेट में जमा कराना होगी। शपथ पत्र देना होगा, जिसमें हर व्यक्ति को मास्क और सैनेटाइजर उपलब्ध कराए जाने की बात लिखी हो और यह भी कि सभा की मंजूरी लेने वाला ही जवाबदेह होगा।”

चुनाव आयोग ने जारी की सभी पार्टियों को एडवायजरी

ऐसी रैलियों पर इलेक्शन कमीशन (EC) भी नाराज है। इलेक्शन कमीशन ने कहा है कि रैलियों में मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का पालन ना किए जाने का मसला हमने गंभीरता से लिया है। ये हमारी गाइडलाइन का उल्लंघन है। ऐसा करने वालों पर एक्शन लिया जाए।

EC ने सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों को एडवायजरी जारी की है। यह पार्टियों के अध्यक्ष और महासचिवों को भेजी गई है। इसमें कहा गया है कि रैलियों के दौरान उल्लंघन करने वाले प्रत्याशियों और आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए चुनाव अधिकारी और प्रशासन कदम उठाएं। EC ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान सतर्कता और सावधानी बरती जाए। रैलियों के दौरान भीड़ को नियंत्रित किया जाए।

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