मध्य प्रदेश

बलिदान दिवस से जुड़े संगठनों को किया दूर:गृहमंत्री अमित शाह के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन की सख्ती से कार्यक्रम से जुड़े 10 संगठनों में नाराजगी

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जबलपुर2 घंटे पहले

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जबलपुर में मालगोदाम प्रतिमा स्थली पर पुलिस ने बेरीकेटिंग कर सख्त सुरक्षा व्यवस्था की है। - Dainik Bhaskar

जबलपुर में मालगोदाम प्रतिमा स्थली पर पुलिस ने बेरीकेटिंग कर सख्त सुरक्षा व्यवस्था की है।

18 सितंबर 1857 में मातृभूमि को स्वतंत्र कराने की खातिर अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की अगुवाई करने वाले गोंडवाना राजा शंकरशाह व उनके पुत्र कुंवर रघुनाथशाह को तोप से उड़ा दिया गया था। उनके 164वें बलिदान दिवस कार्यक्रम में गृहमंत्री अमित शाह सहित सीएम व अन्य लोग शामिल हो रहे हैं। पर बलिदान दिवस के कार्यक्रम से जुड़े संगठनों को ही इन नेताओं से दूर कर दिया गया है। इसे लेकर कार्यक्रम से जुड़े 10 संगठनों में गुस्सा है। गढ़ा गोंडवाना संरक्षण संघ के किशोरीलाल भारती ने गुस्से में अपनी भावना भी व्यक्त कर दी कि नीयत ठीक नहीं है, तो जिस मकसद से आ रहे हैं, वो भी फलीभूत नहीं होगा।

दरअसल गोंडवाना संरक्षण संघ 1980 से राजा शंकरशाह और उनके पुत्र रघुनाथ शाह का बलिदान दिवस मनाता आ रहा है। सुबह 10 बजे सबसे पहले समाज की पाक महिला पूरे क्षेत्र को बांधती हैं और प्रतिमा स्थल पर कार्यक्रम समाप्ति होने तक बैठी रहती हैं। संगठन की मान्यता है कि इस धार्मिक अनुष्ठान के चलते कभी कोई अनहोनी नहीं होने पाया है।

इसके बाद संगठन के लोग पूजन और हवन करेंगे। इसी तरह का पूजन बलिदान स्तंभ और चार दिनों तक वन विभाग के जिस कक्ष में बंद रहे, उस प्रेरणा गृह में पूजन-हवन होगा। इसके बाद उनका मंच से वक्ताओं का संबोधन होगा, जो दोपहर तीन बजे तक चलेगा।

गृहमंत्री राजा शंकरशाह-कुंवर रघुनाथ शाह के 164वें बलिदान दिवस पर पुष्पांजलि अर्पित करने आ रहे हैं जबलपुर।

गृहमंत्री राजा शंकरशाह-कुंवर रघुनाथ शाह के 164वें बलिदान दिवस पर पुष्पांजलि अर्पित करने आ रहे हैं जबलपुर।

गृहमंत्री के कार्यक्रम से संगठन को किया दूर, इससे है नाराजगी

संरक्षण संघ के संभागीय अध्यक्ष किशोरीलाल भलावी के मुताबिक प्रशासन ने संगठन के 10 लोगों का कोविड टेस्ट कराया था कि ये लोग गृहमंत्री के आगमन के समय प्रतिमा स्थल पर मौजूद रहेंगे। बाद में इसकी संख्या पांच और फिर दो कर दी गई। आयोजन से जुड़े 10 संगठनों रविदास, सबरी महासंघ, भीम आर्मी, बसपा, गोंडवाना पार्टी आदि में किसे छोड़ दें।

प्रशासन की ओर से कहा गया है कि गृहमंत्री के आगमन के दौरान माइक, हवन आदि का कार्यक्रम बंद रहेगा। इसे देखते हुए हम 10.30 बजे तक अपना पूजन-हवन का कार्यक्रम कर लेंगे। राजा शंकरशाह-रघुनाथ शाह के बंदीगृह और बलिदान स्थली के विकास के लिए संगठनों ने एक ज्ञापन तैयार किया था, लेकिन ये भी प्रशासन ने देने से मना कर दिया है।

प्रशासन की सख्ती और स्थानीय नेताओं की दूरी से रोष

बलिदान दिवस से जुड़े संगठनों के मुताबिक गृहमंत्री पुष्पांजलि कार्यक्रम में आ रहे हैं, उनका स्वागत है। पर जिस तरह से प्रशासन के लोगों ने और स्थानीय नेताओं ने संगठन को दरकिनार कर अपनी मनमानी थोपने का प्रयास कर रहे हैं, उसे लेकर लोगों में गहरी नाराजगी है।

हर साल महाकौशल के हर जिले से चार से पांच हजार लोग यहां श्रद्धा सुमन अर्पित करने पहुंचते हैं। सभी को अमित शाह व सीएम की मौजूदगी के समय प्रतिमास्थल से दूर रहने के लिए हिदायत दे दी गई है। हालांकि सांसद राकेश सिंह इसे राजनीति से प्रेरित बताया है। कहा कि देश के गृहमंत्री की बजाए उनकी मांग सीएम, सांस्कृतिक विभाग से जुड़े मंत्री कर सकते हैं। हमारी योजना इस स्थल के विकास की कार्ययोजना है। इस पर जल्द ही अमल भी होगा।

वन विभाग के कार्यालय में चार दिन थे कैद, अब प्रेरणा स्थल है ये क्षेत्र।

वन विभाग के कार्यालय में चार दिन थे कैद, अब प्रेरणा स्थल है ये क्षेत्र।

संगठन की ये है मांग-

राजा शंकरशाह-कुंवर रघुनाथ शाह बंदी गृह की भूमि को डीएफओ वन विभाग से खाली कराई गई है। उसमें भव्य गोंडवाना क्रांति प्रवेश क्षरा, 52 गढ़ का क्रांति स्तंभ, आदिवासी महापुरुषों की लायब्रेरी, भव्य सामुदायिक भवन और आदिवासी संस्कृति कार्यालय का निर्माण कराया जाए। वहीं गोंडवाना काल के अस्त्र-शस्त्र, जो कोलकाता के म्यूजियम और सीपीसी एंड बरार के समझौते में नागपुर के संग्रहालय में रखे हुए एतिहासिक अवशेष मंगाकर यहां प्रस्तावित म्यूजियम हाॅल में रखा जाए। इसके अलावा आदिवासियों के खिलाफ बने कानून, विस्थापितों को पट्‌टा आदि देने की मांग शामिल है।

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