मध्य प्रदेश

नानी पर मां को बंधक बनाने का आरोप:हाईकोर्ट ने एक मां के दर्द को समझकर बेटे को लगाई फटकार, हर्जाने के रूप में अब बेटा 5 हजार रुपए मां को देगा

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ग्वालियर4 घंटे पहले

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फाइल  फोटो - Dainik Bhaskar

फाइल फोटो

  • बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दिया फैसला

ग्वालियर में एक युवक ने अपनी ही नानी और मामा पर मां को बंधक बनाकर रखने का आरोप लगाते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। जब मां कोर्ट में पेश हुई और कहा कि पति और बेटा प्रताड़ित करते हैं और वह अपनी मर्जी से अपने मायके में रह रही है। साथ ही मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रही है तो एक मां की दर्दभरी कहानी सुनकर कोर्ट ने बेटे को कड़ी फटकार लगाई है। साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए बेटे पर 5 हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। यह हर्जाना की राशि अब युवक को 7 दिन के अंदर अपनी मां को देना होगा। साथ ही पुलिस को साफ कहा है कि यह महिला जहां जाना चाहे वहां इन्हें छोड़कर आया जाए।

उच्च न्यायालय में ग्वालियर निवासी प्रदीप कुमार द्वारा बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई गई थी। याचिका में कहा गया था कि उसकी मां को उसके मायके में बंधक बनाकर रखा गया है, इसलिए उसे मुक्त कराते हुए उसे उसकी मां वापस दिलाई जाए। न्यायालय के आदेश पर पुलिस याचिकाकर्ता की मां को लेकर शनिवार को कोर्ट में पेश हुई। न्यायालय के पूछने पर महिला ने बताया कि उसने 11 नवंबर 2020 को उसने अपने पति का घर छोड़ा था। घर इसलिए छोड़ा था कि पति का व्यवहार उसके लिए सही नहीं था। अमानवीय बर्ताव के चलते घर छोड़ा था। बेटा भी उसे प्रताड़ित करता था।

अब वह अपनी मर्जी से दतिया में अपनी मां के पास रह रही है। वहीं दतिया में मजदूरी कर अपना गुजारा कर रही है। उसे किसी ने बंधक बनाकर नहीं रखा है। हाईकोर्ट में महिला ने यह भी कहा कि पति और बेटे की हद से ज्यादा प्रताड़ना के बाद भी उसने किसी थाने में शिकायत नहीं की। वह चाहती तो मामला दर्ज करा सकती थी। महिला की पूरी कहानी सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि महिला एक समझदार महिला है। उसे आजादी से जीने का पूरा हक है। न्यायालय ने बेटे की याचिका खारिज करते हुए 5 हजार रुपए हर्जाना लगाया है। साथ ही हर्जाने की राशि सात दिवस के अंदर मां को देने के लिए कहा है।

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