करियर

तीन साल बाद यूजी में फिर ‘सेमेस्टर’ की तैयारी, संसाधनों के अभाव में लागू की गई थी वार्षिक पद्धति

  • Hindi News
  • Career
  • After three years, UG again becomes ‘semester’, initially the annual method was implemented due to lack of resources

दैनिक भास्कर

Mar 09, 2020, 12:49 PM IST

एजुकेशन डेस्क. मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा में फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है,जो सीधे तौर पर छात्रों को प्रभावित करेगा। दरसअल, उच्च शिक्षा विभाग ने शिक्षा पद्धति बदलने के लिए कवायद शुरू कर दी है। इसके चलते तीन साल पहले बंद की गई सेमेस्टर प्रणाली फिर लागू की जा सकती है। यह बदलाव सत्र-2020-21 सेे लागू किया जा सकता है। उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने इस बारे में पिछले दिनों घोषणा भी की थी।

प्रदेश के सभी शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों में स्नातक तथा स्नातकोत्तर कक्षाओं में सेमेस्टर सिस्टम 2008-09 से लागू किया गया था, लेकिन वर्तमान में सिर्फ स्नातकोत्तर स्तर पर ही सेमेस्टर सिस्टम लागू है। स्नातक स्तर पर अब दोबारा सेमेस्टर सिस्टम पर जाते हैं तो सिलेबस बनाने से लेकर विभिन्न गतिविधियां आयोजित करनी होंगी, जो वार्षिक पद्धति को लागू करने के लिए की गई थी। जानकार कहते हैं कि सेमेस्टर पद्धति में सतत मूल्यांकन के शामिल होने से उन्हें लगातार अध्ययन करते रहने के कारण सीखने के अधिक अवसर मिलते हैं। इससे छात्र विषय की गहराई तक पहुंच पाते हैं। सिर्फ इसे सही ढंग से लागू करने की जरूरत है।

इन मामलों में भी ऐसे रहेंगे अवसर

विवरण वार्षिक सेमेस्टर
सह-पाठ्य गतिविधियों के लिए समय कम अधिक
पाठ्येत्तर गतिविधियों के लिए समय पर्याप्त कम
प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय पर्याप्त कम
नामांकन और परीक्षा प्रक्रिया पूरी करने के लिए विवि के पास समय पर्याप्त कम 

अध्यापकों का अध्यापन तथा शोध के लिए समय भार

पर्याप्त  

अधिक
कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाने के अवसर   अधिक कम


बंद करना पड़ा था सेमेस्टर सिस्टम


2010 में विवि तथा विद्यार्थियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए 2011-12 से द्वि प्रश्न-पत्र प्रणाली के स्थान पर एकल प्रश्न-पत्र प्रणाली, सेमेस्टर में प्रोजेक्ट कार्य के स्थान पर अंतिम सेमेस्टर में प्रोजेक्ट कार्य तथा एटीकेटी के नियमों में संशोधन किए गए। लेकिन छात्र संगठनों के दबाव में इसे बंद करना पड़ा।

देश के विभिन्न विवि में लागू है सेमेस्टर सिस्टम


देश के अन्य विश्वविद्यालयों जैसे मुम्बई विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, मद्रास विश्वविद्यालय, बैंगलोर विश्वविद्यालय में सेमेस्टर पद्धति प्रचलन में है। पंजाब विश्वविद्यालय तथा हिमाचल विश्वविद्यालय ने भी सेमेस्टर सिस्टम लागू किया है।

सेमेस्टर पद्धति के पक्ष में है रूसा का परिपत्र


वार्षिक पद्धति के स्थान पर सेमेस्टर पद्धति को अपनाने के बारे में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) ने विभिन्न पक्षों को ध्यान में रखते हुए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। रूसा के परिपत्र में लिखा है कि शैक्षणिक संस्थानों में वार्षिक पद्धित 10 से 12 महीनों का शैक्षणिक सत्र का प्रारूप है। यह प्रारूप सीमाओं से ग्रस्त है। यही वजह है कि पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका के अधिकांश संस्थान एक सेमेस्टर-आधारित प्रणाली का पालन करते हैं। सेमेस्टर प्रणाली एक समय-आधारित प्रारूप से बहुत आगे जाती है। सेमेस्टर पाठ्यक्रम स्थान को बढ़ाता है और सभी संबंधितों के लिए सीखने के त्वरित अवसरों को प्रोत्साहित करता है। इसमें विभिन्न विकल्पों को समायोजित करने की क्षमता है। इसलिए सेमेस्टर सिस्टम को देशभर में अनिवार्य करने की बात कही है। खास बात यह है कि यह अभियान मप्र में भी लागू है।

सेमेस्टर सिस्टम में वार्षिक पद्धति के मुकाबले ज्यादा फायदा

विवरण वार्षिक पद्धति सेमेस्टर सिस्टम
विद्यार्थी की विषय की समझ परीक्षा एक बार परीक्षा होने से सतही और विषय को गहराई से समझने के अवसर कम दो बार परीक्षा होने तथा आंतरिक मूल्यांकन अनिवार्य होने से विषय को गहराई से समझने के अवसर अधिक
व्यक्तित्व विकास और विद्यार्थी की रोजगार पाने की क्षमता आंतरिक मूल्यांकन के कारण अवसर कम अनेक विधाओं के माध्यम से आंतरिक मूल्यांकन के कारण अधिक अवसर
विद्यार्थी के लिए वैकल्पिक विषय चुनने के अवसर कम च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम अपनाए जाने की  सम्भावना के कारण अधिक
विद्यार्थी पर अध्ययन भार तथा तनाव वर्ष में एक बार परीक्षा होने के कारण अधिक वर्ष में दो बार परीक्षा होने के कारण कम
विद्यार्थी में अध्ययन की आदत विकसित करने के अवसर एक बार परीक्षा होने से कम   आंतरिक मूल्यांकन होने से अधिक
फीडबैक लेने तथा उसका लाभ उठाने के अवसर परीक्षा सत्र में एक बार होने तथा आंतरिक परीक्षा सत्र में दो बार होने तथा आंतरिक मूल्यांकन अनिवार्य न होने से कम  मूल्यांकन अनिवार्य होने से अधिक 

अगले सत्र से लागू करेंगे नई व्यवस्था


मध्य प्रदेश सरकारमें उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी नमे बताया कि सेमेस्टर सिस्टम लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। कॉलेजों में रेगुलर असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती कर ली है। जिन कोर्सेस में शिक्षकों की कमी है उनमें अगले सत्र से सेमेस्टर सिस्टम लागू किया जाएगा। इसका परीक्षण करा रहे हैं।

बहुत अच्छा कदम होगा


आईईएचई की पूर्व संचालक डॉ. प्रमिला मैनी के मुताबिक स्नातक स्तर पर भी सेमेस्टर सिस्टम लागू किया जाता है तो यह बहुत अच्छा कदम होगा। यूजीसी भी इसे प्रमोट करते हैं। एक्सीलेंस इंस्टीट्यूट में यह बहुत सफल रहा है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button