मध्य प्रदेश

गेहूं खरीदी केंद्रों में corona का खतरा, नहीं हो रहा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन

Manoj Rathore

| News18Hindi Updated: June 2, 2020, 8:27 PM IST

भोपाल: गेहूं खरीदी केंद्र कहीं corona की मंडी ना बन जाएं,नहीं हो रहा सोशल डिस्टेंस का पालन

भोपाल के गेंहू खरीदी केंद्रों में corona का खतरा (फाइल फोटो)

कुछ दिन पहले राजधानी भोपाल (Bhopal) के खजूरी इलाके में बनाए गए खरीदी केंद्र पर एक हम्माल और वहां तैनात सुरक्षाकर्मी की बेटी कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी. इस खरीदी केंद्र पर आसपास के 6 से ज्यादा गांव के किसान गेहूं तुलाई के लिए आ रहे थे. लेकिन इस वेयरहाउस पर अब तुलाई का काम बंद कर दिया गया है.

भोपाल. राजधानी भोपाल के गेहूं खरीदी केंद्रों पर कोरोना (Corona) का खतरा मंडरा रहा है. यह खतरा इसलिए ज्यादा बढ़ गया है, क्योंकि इन सभी खरीदी केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) का बिल्कुल पालन नहीं हो रहा है. प्रशासन के अधिकारी और मंडी के जिम्मेदार अफसर सोशल डिस्टेंस के नाम पर खानापूर्ति कर आ रहे हैं. इतना ही नहीं खजूरी इलाके के खरीदी केंद्र पर हम्माल के पॉजिटिव निकलने के बावजूद भी अभी तक दूसरी खरीदी केंद्रों के प्रबंधक ने सबक नहीं लिया है. खरीदी केंद्रों पर लापरवाही और अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है.

कुछ दिनों पहले राजधानी भोपाल के खजूरी इलाके में बनाए गए खरीदी केंद्र पर एक हम्माल और वहां तैनात सुरक्षाकर्मी की बेटी कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी. इस खरीदी केंद्र पर आसपास के 6 से ज्यादा गांव के किसान गेहूं तुलाई के लिए आ रहे थे. लेकिन इस वेयरहाउस पर अब तुलाई का काम बंद कर दिया गया है. हालांकि इस तुलाई केंद्र से राजधानी भोपाल के बाकी इलाकों में बने गेहूं खरीदी केंद्र ने सबक नहीं लिया है. अभी भी वहां पर लापरवाही का मंजर देखा जा सकता है. किसानों को खरीदी केंद्रों पर 4 से 5 दिन तक रुकना पड़ता है. इस दौरान उनकी गेहूं से भरी ट्राली अव्यवस्थित रूप से नहीं खड़ी रहती हैं. इसके अलावा खरीदी केंद्रों पर उनके रुकने के इंतजाम नहीं होने की वजह से सभी किसान एक ही टीन शेड या फिर जमीन पर रात गुजारने के लिए मजबूर रहते हैं.

ये हो रही लापरवाही


1- राजधानी भोपाल में एक दर्जन से ज्यादा गेहूं खरीदी केंद्र बनाए गए हैं. इन खरीदी केंद्रों पर आसपास के इलाकों के किसान अपने गेहूं को बेचने के लिए आते हैं.2- यहां पर ना ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो रहा है और ना ही प्रशासन की गाइडलाइन को माना जा रहा है. कारण है कि खरीदी केंद्रों के जिम्मेदार यहां पर व्यवस्था को बनाने में नाकाम साबित हो रहा है.

3- खरीदी केंद्रों पर ट्रॉली अव्यवस्थित रूप से खड़ी हैं. किसानों के रुकने की व्यवस्था नहीं है.


4- जब गेहूं की तुलाई होती है, उस दौरान भी किसान हम्माल और तुलाई करने वाला व्यक्ति पास पास खड़े होते हैं. सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जाता है.


5- जब किसान अपनी ट्रॉली को कांटे पर ले जाता है, उस दौरान भी वहां पर भीड़ देखी जा सकती है. इतना ही नहीं खरीदी केंद्रों पर ट्रॉलियों की लंबी-लंबी लाइन लगी है. किसान को खरीदी केंद्रों पर 4 से 5 दिन 5 दिन का इंतजार करना पड़ता है.


6- ऐसे में तुलाई केंद्रों पर काम करने वाले मजदूर हो या फिर किसान सभी को कोरोना का सबसे ज्यादा खतरा है.

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First published: June 2, 2020, 7:41 PM IST

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