मुंबई
सुप्रीम कोर्ट से 32 महीने के गर्भ को गिराने की इजाजत मिलने के बाद अबॉर्शन कराने गई 13 साल की रेप पीड़िता ने बच्चे को जन्म दिया है। पीड़िता के परिवार ने कोर्ट में अबॉर्शन कराने की गुहार लगाई थी लेकिन अब उन्होंने बच्चे को स्वीकार करने का फैसला किया है।

जेजे अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग के कार्यकारी डीन और प्रफेसर विनायक काले ने प्रेट्र को बताया, 'आज दोपहर बाद आपरेशन किया गया जिसके बाद बच्ची ने एक शिशु को जन्म दिया। नवजात का वजन 1.8 किलोग्राम है और उसे बाल चिकित्सा विभाग के आईसीयू में रखा गया है।'

दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने 32 सप्ताह की गर्भवती बच्ची को उसकी मेडिकल रिपोर्ट और यौन शोषण की प्रताड़ना को देखते हुए गर्भपात की अनुमति दी थी। लेकिन चिकित्सकों की राय के बाद ऐसा नहीं हो सका था।
डा काले ने बताया, 'हमने उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार अबॉर्शन करने की कोशिश की लेकिन हमने पाया कि भ्रूण पूरी तरह से विकसित हो चुका है और उसका प्रसव कराना ही एकमात्र रास्ता था।' यह डॉक्टर इस मामले को देखने के लिए शीर्ष अदालत द्वारा गठित की गई समिति के सदस्य भी हैं। उन्होंने बताया कि मां और बच्चा सुरक्षित है।
    

पीड़िता के कजन ने बताया, 'वह बच्चे को रखना चाहती थीं। हम भी जानते हैं कि इतने दिनों के गर्भ को गिराना मां के लिए भी खतरे से खाली नहीं होता है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हमें वापस मुड़ना मुश्किल था।' पीड़िता की मां ने कहा, 'सर्जरी के बाद वह पूरी तरह ठीक हैं और हम खुश हैं।'

Source : Agency