रायपुर
छत्तीसगढ़ के करीब 32 आईएएस,आईपीएस और आईएफएस अफसरों पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं करने पर याचिकाकर्ता राजकुमार मिश्रा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर किया है. मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के डिवीजन बैंच में शासन के अधिवक्ता ने विधि एवं विधायी का एक पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए नाराजगी जाहिर की और 22 नवम्बर तक शासन से विस्तृत में शपथपत्र में जवाब मांगा है. जवाब में पूछा गया है कि 2015-16 और 17 में किन - किन अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति और कार्रवाई पेंडिंग है.

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ के करीब 32 आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अफसरों पर विभागीय कार्रवाई नहीं होने पर चिरमिरी निवासी आरटीआई कार्यकर्ता राजकुमार मिश्रा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी. मामले को गम्भीरता से लेते हुए हाईकोर्ट चीफ जस्टिस ने जनवरी 2017 को शासन को आदेश दिया था की दिसंबर 2017 तक विभागीय जांच पूरी कर दी जाए. साथ ही याचिका कर्ता को कहा था की अगर कार्रवाई नहीं होता है तो वे कोर्ट में इसकी शिकायत कर सकते है.

1 साल बीत जाने के बाद भी करवाई नहीं होने पर राजकुमार मिश्रा ने हाईकोर्ट में पूर्व मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन के खिलाफ अवमानना याचिका भी लगाया था. इस बार हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के डिवीजन बैंच में मिश्रा कि जनहित याचिका में सुनवाई हुई. जिसमें कोर्ट ने शासन से 22 नवंबर तक विस्तृत में शपथपत्र में जवाब मांगा है.

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