नई दिल्ली
सोशल मीडिया पर चल रहा #MeToo कैंपेन से जुड़ा एक मामला गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया। दरअसल एक महिला पत्रकार द्वारा यौन आरोपों का सामना कर रहे कुछ लोगों ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई कि अभियोक्ता को सोशल मीडिया या अन्य मंचों पर अपने अनुभव साझा कर आरोप लगाने से रोका जाए। याचिकाकर्त्ताओं के अनुरोध पर हाईकोर्ट ने अहम आदेश देते हुए कहा कि आरोप लगाने वाला और आरोपों का सामना करने वाला दोनों में से कोई भी सोशल मीडिया पर एक दूसरे की पहचान उजागर न करे। दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वीके राव की एक पीठ ने दोनों पक्षों को इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से बचने एवं सोशल मीडिया पर इसमें शामिल लोगों की पहचान उजागर न करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने निर्देश दिया कि वे अंतर-विवाद के संबंध में मीडिया संगठनों को साक्षात्कार न दें और इस मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष को उनकी राय के सोशल मीडिया पर प्रसारित करने से भी रोके। यह आदेश उन व्यक्तियों के आवेदन पर दिया गया, जिनके खिलाफ महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। याचिका में कहा गया था कि हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध महिला मामले में शामिल लोगों की पहचान उजागर कर रही है। महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि एक ऑनलाइन न्यूज पोर्टल में काम के दौरान उसका यौन उत्पीड़न किया गया।

बता दें कि पिछले साल 2017 में महिला ने कुछ लोगों के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। तब हाईकोर्ट ने कहा था कि यौन उत्पीड़न मामले में शामिल सभी लोगों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। वहीं अब देश में शुरू हुई  #MeToo की लहर के बीच खुद उसी महिला ने ट्विटर और फेसबुक पर अपनी पहचान के साथ ही आरोपियों के नाम भी उजागर किए हैं। इतना ही उसने घटित हुई पूरी घटना को भी साझा किया।

Source : Agency