बॉलिवुड ऐक्ट्रेस तनुश्री दत्ता ने ओशिवरा पुलिस स्टेशन में बीते बुधवार को अपना बयान दर्ज करवाया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि जब साल 2008 में 'हॉर्न ओके प्लीज़' के सेट पर हैरसमेंट की शिकायत की थी तो उसके बाद उनके खिलाफ पुलिस और कोर्ट के झूठे केस की धमकी दी गई थी।

बताना चाहेंगे कि ऐक्टर नाना पाटेकर, कोरियॉग्रफर गणेश आचार्य और फिल्म डायरेक्टर राकेश सारंग और प्रड्यूसर सामी सिद्दीकी के खिलाफ तनुश्री के बयान को रिकॉर्ड करने में पुलिस को चार घंटे लगे। बता दें कि तनुश्री ने इस मामले में 6 अक्टूबर को लिखित शिकायत दर्ज करवाई थी।

मुंबई पुलिस प्रवक्ता, मंजुनाथ शिंगे ने बताया, 'इस मामले में धारा 354 (जब कोई किसी महिला की मर्यादा को भंग करने के लिए उस पर हमला या जोर-जबरदस्ती करे) और धारा 509 (किसी औरत के शील या सम्मान को चोट पहुंचाने वाली बात करना या हरकत करना) के तहत ओशिवरा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है।'

"मुझे उनसे यह धमकी भी मिली कि मुझे पुलिस और कोर्ट के झूठे केस में घसीटा जाएगा और फिल्म इंडस्ट्री से बॉयकॉट कर दिया जाएगा"-तनुश्री

पुलिस ने जानकारी दी है कि तनुश्री के निवेदन पर उनका यह बयान इंग्लिश में दर्ज किया गया है, जहां उनके वकील और दो महिला पुलिस अधिकारी भी मौजूद थीं, जिसमें से एक सीनियर ऑफिसर थीं।


पुलिस को दिए तनुश्री के बयान के मुताबिक, 'शूटिंग के चौथे दिन 26 मार्च 2008 को वहां सेट पर 100 सपॉर्टिंग स्टाफ मौजूद थे, जिनमें जूनियर आर्टिस्ट, डांसर और कुछ अन्य लोग शामिल थे। नाना पाटेकर ने मेरी इच्छा और सहमति के बगैर मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और मुझे चारों तरफ इस बहाने से घुमाने लगे जैसे कि वह मुझे डांस सिखा रहे हों, जबकि वह कोरियॉग्रफर नहीं थे। जब वह मुझे बेमतलब और गलत तरीके से छूने लगे तो किसी ने इसपर सवाल नहीं किया। सभी इस अपराध का हिस्सा बने क्योंकि सब चुपचाप मूक दर्शक बने रहे। मुझे काफी अनकम्फर्टेबल लग रहा था। उन्होंने कोरियॉग्रफर और जूनियर आर्टिस्टों को वहां से जाने को कहा ताकि वह मुझे डांस स्टेप सिखा सकें। उनका यह व्यवहार सही नहीं था और मैं इसे लेकर बिल्कुल भी कम्फर्टेबल फील नहीं कर रही थी। मैंने ठीक उसी दिन अपनी फिल्म के प्रड्यूसर, डायरेक्टर और कोरियॉग्रफर से नाना पाटेकर के इस व्यवहार के खिलाफ शिकायत की।'

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