बिलासपुर
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के डिवीजन बैंच में गरीबी शब्द हटाए जाने और उन्हें आम लोगों की तरह जीने का अधिकार दिलाने को लेकर जनहित याचिका दायर किया गया था. इस मामले को हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है. हाईकोर्ट का कहा है कि इस याचिका में कोई भी सेंस नही है. यह सिर्फ कोर्ट का समय बर्बाद करने वाली याचिका है.

बता दें कि दरअसल राजधानी रायपुर में रहने वाले पवन कुमार अग्रवाल ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी. इस याचिका में कहा गया था कि गरीबों को गरीब न कहा जाए. उन्हें भी आम लोगों की तरह रहने का अधिकार है. याचिका में मांग किया गया था कि गरीबों को भी आर्टिकल 14 के तहत फंडामेंटल राईटस प्राप्त है. इस वजह से राज्य सरकार और केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि उन्हें भी सामाजिक और राजनीतिक रूप से समाज में लगा जाए. अब इस मामले की सुनवाई को हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है.

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