नई दिल्ली
मोदी सरकार में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर #MeToo अभियान के तहत उत्पीड़न मामले में घिरते नजर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोदी सरकार एमजे अकबर का नाम मी टू में आने पर सख्त हो गई है। ऐसे में अकबर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। अकबर फिलहाल नाइजीरिया दौरे पर हैं और उनके भारत वापिस आने के बाद ही इस पर कोई विचार होगा। केंद्र अकबर से इन आरोपों के बारे में हकीकत जानने के बाद ही कोई फैसला लेगी।

महिला पत्रकार के लगाए आरोपों के बाद केंद्र सरकार भी इस मामले को लेकर सख्त हैं और भाजपा नहीं चाहेगी कि पार्टी की छवि पर इसका कोई असर पड़े। वहीं कांग्रेस के बाद अब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी यौन शोषण के मामले में घिरे एमजे अकबर के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी ने कहा कि अब तक कुल 9 महिलाओं ने अकबर पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। यह घटनाएं उस समय की हैं जब वह अखबारों के संपादक थे। पार्टी का कहना है कि एक केन्द्रीय मंत्री पर इस तरह के आरोप लगने के बाद उनका सरकार में बने रहना स्वीकार्य नहीं है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अकबर के मामले पर चुप्पी साध ली है। बता दें कि कांग्रेस ने भी राज्य विदेश मंत्री से इस्तीफे की माग की है। कांग्रेस ने कहा कि ऐसे आरोपों के बाद अकबर पद पर कैसे रह सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि महिला पत्रकार ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें उसने लिखा कि एमजे अकबर ने जॉब इंटरव्यू के लिए उसे होटल के कमरे में बुलाया और शराब ऑफर की। इतना ही नहीं, एम जे अकबर ने महिला को बेड पर आने को भी कहा। हालांकि, महिला ने यह भी कहा कि वह उस दिन किसी तरह बच गई।

Source : Agency