गर्भावस्‍था के दौरान योग, जिसे प्रसव-पूर्व योग कहा जाता है, करने से गर्भवती महिला का दिमाग शांत रहता है। डिलिवरी से पहले योग विशेषज्ञ और डॉक्टर्स बार-बार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि साधारण व्‍यायाम जैसे पैदल चलना और योग से गर्भावस्‍था की परेशानियों को दूर किया जा सकता है। प्राणायाम को तीनों तिमाहियों में दिनचर्या में शामिल किया जाना चाहिए, क्‍योंकि इससे क्रोध और तनाव जैसे नकारात्‍मक मनोविकारों से मुक्‍ति मिलती है। यहां हम आपको बता रहे हैं कुछ साधारण आसन जिन्हें आप गर्भावस्था के दौरान भी कर सकती हैं।

तितली आसन
यह आसन गर्भावस्था के तीसरे महीने से कर सकते हैं। इससे शरीर में लचीलापन आता है और साथ में डिलिवरी के दौरान तकलीफ कम होती है। इस आसन को करने के लिए दोनों पैरों को सामने की ओर मोड़कर अपने पैर मिला लें। दोनों पैरों को नमस्ते की मुद्रा बनाएं। दोनों हाथों की उंगलियों को क्रॉस करते हुए पैर के पंजे को पकड़ें और अपने पैरों को ऊपर नीचे की ओर पकड़े। अगर इस आसन को करने आपको निचले हिस्से में दर्द महसूस हो तो इसे बिल्कुल ना करें।

पर्वतासन
इस आसन को करने से कमर दर्द से राहत मिलती है और डिलिवरी के बाद वजन भी ज्यादा नहीं बढ़ता। इस आसन को करने के लिए पहले सुखासन में आराम से बैठे। पीठ को सीधा रख कर सांस को अंदर खींच कर दोनों हाथों को नमस्ते की मुद्रा में जोड़ लें। कुछ समय तक इस अवस्था में रहें और थोड़ी देर में सामान्य हो जाएं। इस आसन को 2-3 बार से ज्यादा न करें।

उष्ट्रासन आसन
इस आसन को करने से खून का प्रभाव ठीक होता है और रीढ़ की हड्डी भी मजबूत होती है। इससे ऊर्जा लेवल बढ़ता है। इसके लिए जमीन पर कपड़ा बिछा कर घुटनों के बल खड़े हो जाएं और सांस को अंदर को खींचते हुए शरीर को धीरे-धीरे पीछे को झुकाएं। अब हाथों से दोनों एडियों को पकड़ने की कोशिश करें। इसे करते हुए गर्दन और दोनों हाथों को सीधा रखें। इस आसन को 30 सैकेंड से 1 मिनट तक ही करें।

वक्रासन
इस आसन को करने से रीढ़, पैर, गर्दन को हल्की मसाज मिलती है। सीधे बैठें और अपने पैर सामने फैला लें। सांस भरते हुए अपने बाहों को कंधे तक ऊपर उठाएं। हथेली नीचे की तरफ रखें। अब सांस छोड़ते हुए अपने शरीर को कमर की तरफ से थोड़ा मोड़ें और अपने सर और हाथों को भी उसी दिशा में मोड़े। अपने घुटनों को झुकने न दें। अब सांस भरते हुए आॅरिजनल पोजिशन में वापस आएं और अपने हाथों को अपने कंधों के स्तर पर एक-दूसरे से सामांतर पोजिशन पर रखें। यही प्रक्रिया दूसरी तरफ से दोहराएं।

उत्‍कतासन
सबसे पहले सीधे खड़े हो जाए। इसके बाद धीरे-धीरे कुर्सी पर बैठने के तरीके में अपने घुटनों को मोड़ने की कोशिश करें। इस मुद्रा को करने के दौरान आप अपने दोनों हाथों को नमस्‍कार की मुद्रा में सीधा उठाकर ऊपर की ओर ले जाएं। इस आसन को करने से शरीर में खून की स्त्राव सुचारू रूप से होने लगता है और रीढ़ की हड्डिया मजबूत होती हैं जिससे गर्भावस्था के समय पीठ दर्द या कमर दर्द से बचा जा सकता है।

कोणासन
इस आसन को करने के लिए आपको अपने पैरों में 24 इंच की दूरी बनाते हुए खड़े होना है। आप किसी दीवार के पास खड़े होकर यह आसन सकती हैं। इसके बाद सांस लेते हुए अपने दाएं हाथ को सीधे ऊपर उठाते हुए बाएं ओर झुकाने का प्रयास करें। फिर सामान्‍य अवस्था में आते हुए सांस छोड़ना शुरु करें। इसी तरह से यह प्रक्रिया दूसरी तरफ के लिये भी दोहराएं। इस आसन को करने से कमर दर्द के साथ प्रसव में आने वाली दिक्कतों से छुटकारा मिलता है।

हस्त पनंगस्तासन
अपनी पीठ के बल लेटे। अपने पैर सीधे करें। अपने शरीर को एक लाइन में रखें। अपने हाथों को टी-पोजिशन में रखें औऱ हथेलियां नीचे रखें। ज्यादा हार्ड कोशिश न करें। अपने सीधे हाथ से अपने पैर के अंगूठे को पकड़ने की कोशिश करें और वापस आएं। इस आसन से रीढ़ को मजबूती मिलती है।

पर्यंकासन
पहले घुटनों पर खड़े हो जाएं फिर पीछे की ओर झुकते हुए धीरे-धीरे पीठ के बल लेट जाएं। शरीर को पीछे की ओर झुकाते हुए कोहनियों का सहारा लें और लेटने के बाद दोनों घुटनों को आपस में मिलाकर रखें। अपने दोनों हाथों की उंगलियों को सीने पर खोलकर रखें। आसन के अभ्यास के समय सांस लेने की क्रिया धीमी रखें। यह आसन प्रसव में लाभ करता है। इसे चौथे महीने बाद नहीं करना चाहिए। इस आसन से रक्त संचार सही रहता है।

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