नई दिल्ली   
 

 शारदीय नवरात्र में कलश स्थापना का खास महत्व है. नवरात्र के प्रथम दिन पूजा घर में कलश स्थापना की जाती है. नवरात्रि में कलश स्थापना का खास महत्व होता है इसलिए कलश स्थापना सही और उचित मुहूर्त में ही करनी चाहिए.

नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना  

कलश स्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि को किया जाएगा. यह चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में संपन्न होगा. आइए जानते हैं नवरात्रि घटस्थापना के सबसे श्रेष्ठ और उत्तम मुहूर्त कौन से हैं और इसकी स्थापना विधि के नियम क्या हैं?

बुधवार से शुरू हो रहे हैं नवरात्र, इस दिन होगी दो देवियों की एक साथ पूजा

नवरात्रि कलश स्थापना शुभ मुहूर्त 2018 

नवरात्रि कलश स्थापना शुभ मुहूर्त 10 अक्टूबर 2018 को बुधवार के दिन होगा. इस बार कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सिर्फ एक घंटे दो मिनट तक ही रहेगा. कलश स्थापना मुहूर्त सुबह 06:22 से 07:25 तक रहेगा. शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के लिए आपको सोमवार को ही सारी तैयारियां कर लेनी चाहिए.

शारदीय नवरात्र के 10वें दिन ही क्यों मनाया जाता है दशहरा?

अगर सुबह कलश स्थापित ना कर पाएं  

अगर इस दौरान किसी वजह से आप कलश स्‍थापित नहीं कर पाते हैं, तो 10 अक्‍टूबर को सुबह 11:36 बजे से 12:24 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्‍थापना कर सकते हैं.

मां दुर्गा की पूजा करते समय भूलकर भी ना करें ये काम

इस समय ना करें कलश स्थापना 

ध्‍यान रहे कि शास्‍त्रों के अनुसार, अमावस्‍यायुक्‍त शुक्‍ल प्रति‍पदा मुहूर्त में कलश स्‍थापित करना वर्जित होता है. इसलिए किसी भी हाल में 9 अक्‍टूबर को कलश स्‍थापना नहीं होगी.

जानें, नवरात्र में किस दिन किस रंग के कपड़े पहनना होता है शुभ

नवरात्र में कैसे करें कलश स्थापना 

नवरात्र के प्रथम दिन स्नान-ध्यान करके माता दुर्गा, भगवान गणेश, नवग्रह कुबेरादि की मूर्ति के साथ कलश स्थापन करें. कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक लिखें. कलश स्थापन के समय अपने पूजा गृह में पूर्व के कोण की तरफ अथवा घर के आंगन से पूर्वोत्तर भाग में पृथ्वी पर सात प्रकार के अनाज रखें.

संभव हो, तो नदी की रेत रखें. फिर जौ भी डालें. इसके उपरांत कलश में गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, कलावा, चंदन, अक्षत, हल्दी, रुपया, पुष्पादि डालें. फिर 'ॐ भूम्यै नमः' कहते हुए कलश को सात अनाजों सहित रेत के ऊपर स्थापित करें.

अब कलश में थोड़ा और जल या गंगाजल डालते हुए 'ॐ वरुणाय नमः' कहें और जल से भर दें. इसके बाद आम का पल्लव कलश के ऊपर रखें. तत्पश्चात् जौ अथवा कच्चा चावल कटोरे में भरकर कलश के ऊपर रखें. अब उसके ऊपर चुन्नी से लिपटा हुआ नारियल रखें.

हाथ में हल्दी, अक्षत पुष्प लेकर इच्छित संकल्प लें. इसके बाद 'ॐ दीपो ज्योतिः परब्रह्म दीपो ज्योतिर्र जनार्दनः! दीपो हरतु मे पापं पूजा दीप नमोस्तु ते. मंत्र का जाप करते दीप पूजन करें. कलश पूजन के बाद नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे!' से सभी पूजन सामग्री अर्पण करते हुए मां शैलपुत्री की पूजा करें.

नवरात्र के दौरान भूलकर भी ना करें ये 12 काम!

कलश स्थापना के नियम  

आराधना का यह पर्व प्रथम तिथि को घट स्थापना (कलश या छोटा मटका) से आरंभ होता है. साथ ही नौ दिनों तक जलने वाली अखंड ज्योति भी जलाई जाती है. घट स्थापना करते समय यदि कुछ नियमों का पालन भी किया जाए तो और भी शुभ होता है. इन नियमों का पालन करने से माता अति प्रसन्न होती हैं.

अगर आप घर में कलश स्थापना कर रहे हैं तो सबसे पहले कलश पर स्वास्तिक बनाएं. फिर कलश पर मौली बांधें और उसमें जल भरें. कलश में साबुत सुपारी, फूल, इत्र और पंचरत्न व सिक्का डालें. इसमें अक्षत भी डालें

Source : Agency