मुंबई
मुंबई के एक परिवार ने लगभग मरणासन्न हालत में मिले एक दुर्लभ और अत्यधिक लुप्तप्राय सफेद पूंछ वाले गिद्ध को नया जीवन प्रदान किया है। आईयूसीएन की लाल सूची में शामिल यह जीव अब उड़ान भरने को तैयार है।

आठ महीने की देखभाल के बाद शक्तिशाली और क्रोधी पक्षी 10 अक्टूबर को आकाश में उड़ान भरेगा। लगभग तीन फीट लंबे पक्षी के पंख लगभग नौ फीट तक फैल जाते हैं।

इसे बचाने वाले प्रदीप डिसूजा ने बताया, "मंगलवार (नौ अक्टूबर) को हम इस खूबसूरत पक्षी को पादरी फादर जो डिसूजा की विशेष पूजा के लिए बलार्ड एस्टेट स्थित सैंट जॉन चर्च ले जाएंगे। इसके अगले दिन हम इसे नासिक के घने जंगलों में छोड़ देंगे।"

उन्होंने कहा कि प्रार्थना के बाद वन विभाग के अधिकारियों की एक टीम और एक पशु चिकित्सक पक्षी का निरीक्षण करेगा और मेडिकल स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी करेगा जिसके बाद इसे आजाद करने की अनुमति देगा। उन्होंने कहा कि यह पक्षी आईयूसीएन (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर) की अत्यधिक लुप्तप्राय जीवों की लाल सूची में शामिल है।

पर्यावरणविदें के बीच मुंबई के बर्डमैन के नाम से मशहूर डिसूजा (42) और उनके परिवार ने गिद्ध को स्वस्थ करने के लिए दिन-रात एक कर दिए।

डिसूजा ने आईएएनएस को बताया, "हम इसे 21 फरवरी की शाम दक्षिण मुंबई मे रेई मार्ग की झुग्गी बस्ती से यहां लाए थे। यह मुख्य मार्ग के किनारे गंभीर घायलावस्था में पड़ा था, इसके शरीर से खून निकल रहा था और इसकी लंबी गर्दन में सूजन थी जिसके चारों तरफ कीड़े मंडरा रहे थे लेकिन कई घंटों तक कोई भी इसकी मदद के लिए नहीं आया।"

उन्होंने कहा कि यहां तक कि कई गैर सरकारी संगठन और पशु रक्षक संगठनों ने भी डिसूजा की बात को यह कहते हुए नजरंदाज कर दिया कि मुंबई के जंगलों में ऐसे दुर्लभ और अत्यधिक लुप्तप्राय जीव का मिलना असंभव है। अंत में वह अपने घर से लगभग छह किलोमीटर दूर मौके पर पहुंचे, और उसे अपने घर (नर्सिग होम) ले आए और उसका अस्थायी इलाज करने लगे।

किला क्षेत्र में लगभग 100 साल पुरानी क्वींस मैंशन इमारत की छत पर अन्य बीमार और घायल पक्षियों के साथ उसका भी इलाज करने लगे। नर्सिग होम में सफेद पूंछ वाले गिद्ध के अतिरिक्त लगभग 150 चीलें और बाज, 100 कबूतर, दो दर्जन उल्लू, कई बगुले मौजूद हैं। सभी पक्षी आपसी सौहार्दपूर्वक एक छत के नीचे फड़फड़ाते रहते हैं। कई पक्षी इलाज के बाद छोड़ दिए गए हैं और कई भर्ती कर लिए गए हैं। डिसूजा ने 25 वर्षो से अपने जीवन को बेजुबान घायल पक्षियों का इलाज करने पर समर्पित कर दिया है।

Source : Agency