चुनाव आयोग ने 5 राज्यों की विधानसभा चुनावों का ऐलान कर दिया है। जिसके साथ ही छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तेलंगाना और मिजोरम में आज से आचार संहिता लागू हो गई है। चुनावों के ऐलान के साथ ही राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। ​कांग्रेस और मोदी सरकार चुनावी बिगुल फूंक चुकी है। वहीं 5 राज्यों की 83 लोकसभा सीटों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की अग्नि परीक्षा है। 

आगामी चुनाव में मोदी और शाह की सीधी टक्कर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ है। जहां भाजपा अपनी 64 सीटों को बचाने का जोर लगा रही है तो वहीं कांग्रेस इन सीटों पर ​कब्जा जमाने का हर संभव प्रयास कर रही है। ऐसे में दोनों पार्टियों के आगे कड़ी चुनौती है। वहीं मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा पिछले पंद्रह साल से और राजस्थान में पांच साल से सत्ता में है। 


कांग्रेस के लिए राजस्थान की राह थोड़ी मुश्किल हो सकती है क्योंकि 2013 में हुए चुनावों में कांग्रेस को करारी मात देकर भाजपा सत्ता में आई थी। ऐसे में देखना यह होगा कि कांग्रेस अबकी बार राज्य में जीत हासिल कर पाएगी या फिर इस बार भी खाता खोलने में विफल रह जाएगी। वहीं राजस्थान में भाजपा को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। पिछले दिनों जब राजस्थान में अलवर और अजमेर में लोकसभा चुनावों के लिए उपचुनाव हुए तो भाजपा को इसमें करारी हार झेलनी पड़ी थी। इसके बाद से ही लग रहा है कि भाजपा में राजस्थान में हालात सही नहीं हैं। 

दरअसल मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में काफी अर्से से राज्यों के चुनाव लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हो रहे हैं। इनके चुनाव नतीजे तय करेंगे कि लोकसभा चुनाव में राजनीतिक ध्रुवीकरण का रास्ता खुलेगा या बंद होगा। इन्हीं चुनावों से तय होगा कि विपक्षी गठबंधन बनेगा या नहीं और भाजपा को भी पता चलेगा कि उसके मुकाबले विपक्ष का स्वरूप क्या होगा।

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