नई दिल्ली 
हाल ही की घटनाओं में एनडीए की ताक़त और विपक्ष की कमजोरी देखने को मिली। उपसभापति चुनाव में एनडीए को 232 में 125 वोट मिले और विपक्ष को सिर्फ 105 वोट मिले। 20 जुलाई को सरकार के खिलाफ लाये अविश्वाश प्रस्ताव में भी विपक्ष को 451 वोट में सिर्फ 126 वोट मिले जबकि सरकार को 325 वोट मिले। महागठबंधन बनने का आधार सिर्फ 2014 में मिले वोट शेयर हीं है।

देश के आठ बड़े राज्यों में भाजपा विरोधी मोर्चे ने आकार लेना शुरू कर दिया है। राज्य हैं- उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, और पश्चिम बंगाल। इन आठों राज्यों की कुल सीट 322 है। यही आठ राज्य फैसला करेंगे कि केंद्र में किसकी सरकार बनेगी। जीत किसकी होगी यह भविष्य के गर्भ में है लेकिन हम यह अंदाजा तो लगा ही सकते हैं कि इन राज्यों में महागठबंधन और एनडीए का स्वरूप क्या होगा?

 2014 के वोट शेयर को देखें तो एनडीए को 43.3 वोट मिले वहीँ महागठबंधन को 50.51% वोट मिले। 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी , राष्ट्रीय लोक दल और कांग्रेस को महागठबंधन बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसका नतीजा उन्हें अनुकूल भी मिला। कैराना, गोरखपुर और फूलपुर चुनावों में उन्हें जीत मिली। लेकिन 2019 में कौन सी पार्टी बढ़े भाई की भूमिका निभाएगी इस पर विवाद हो सकता है। फिलहाल बढ़े भाई के लिए पिछले आंकड़े सपा के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। समाजवादी पार्टी किसी भी सूरत में बसपा से कम सीट पर राज़ी नहीं होगी अगर पोस्टपोल अलायन्स पर समझौता होता है तो भी उसका फायदा बीजेपी को होगा। उत्तर प्रदेश में दलित और यादव वोटर्स में सामाजिक दूरी है, इनको साथ में लाना सपा और बसपा नेताओं के लिए मुश्किल होगा। बीजेपी, अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी बीच गठबंधन जारी रहेगा। उनके बीच सीटों को लेकर दिक्कत नहीं होगी। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर 42.63% था जो 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में घट कर 41.57% रह गया है।

Source : Agency