मुंबई 
महाराष्ट्र में किसानों की खुदकुशी के आंकड़े कम नहीं हो रहे हैं। एक आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक इस वर्ष जनवरी से अब तक 1307 किसान खुदकुशी कर चुके हैं। इसका मतलब है कि पिछले छह महीने की अवधि में हर रोज औसतन 7 किसानों ने खुदकुशी की है। ऐसा तब है जबकि पिछले वर्ष महाराष्ट्र सरकार ने किसानों की कर्जमाफी की घोषणा की थी।  
 

बता दें कि पिछले वर्ष जनवरी से जून के बीच किसानों की खुदकुशी के 1398 मामले सामने आए थे। ऐसे में यह आंकड़ा इस वर्ष जरूर 91 कम हुआ है लेकिन अगर महाराष्ट्र के अलग-अलग क्षेत्रों की बात करें तो कई जगह इस वर्ष खुदकुशी के आंकड़े बढ़े हैं। 

विदर्भ में सबसे अधिक 598 मामले 
आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक मराठवाड़ा क्षेत्र में इस वर्ष 477 किसानों की खुदकुशी के मामले सामने आए हैं जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 454 था। इससे भी चिंताजनक स्थिति यह है कि विदर्भ क्षेत्र में जहां से खुद सीएम देवेंद्र फडणवीस आते हैं, इस वर्ष भी सबसे अधिक किसानों की खुदकुशी के मामले सामने आए हैं। यहां अब तक 598 किसानों ने खुदकुशी की है। हालांकि यह आंकड़ा पिछले वर्ष के मुकाबले 58 कम है। 

अब तक 38 लाख किसानों को भुगतान 
जहां तक किसानों की कर्जमाफी की बात है तो 77.3 लाख अकाउंट में से अभी तक करीब 38 लाख किसानों को भुगतना किया गया है। भुगतान प्रक्रिया की धीमी रफ्तार ने भी किसानों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। दरअसल, पिछले वर्ष की तुलना में 2017-18 में फसल ऋण की लागत 40 फीसदी कम रही। इस कारण से बकाया भुगतान नहीं होने से बैंकों से नए लोन नहीं दिए। इस वर्ष अप्रैल-मई में फसल ऋण की कुल लागत पिछले वर्ष की तुलना में 1426 करोड़ कम थी। यही वजह रही कि खुद सीएम फडणवीस ने केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखकर बैंकों को इस प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश देने का अनुरोध किया था। 

'सरकारी खरीद प्रक्रिया हो बेहतर' 
फसलों की कीमत भी एक गंभीर मसला है। हालांकि केंद्र ने हाल ही में 14 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी की है। बावजूद इसके यहां के किसानों का मानना है कि सरकारी खरीद की जो फिलहाल स्थिति है उसे देखते हुए उन्हें भुगतान के लिए महीनों इंतजार करना पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि जब तक सरकारी खरीद की प्रक्रिया को और बेहतर नहीं किया जाता, तब तक उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य का फायदा सही से नहीं मिलेगा। 

Source : Agency