पटना 
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अध्यक्ष अमित शाह गुरुवार को बिहार की राजधानी पटना पहुंचने वाले हैं। शाह के बिहार दौरे के बीच मुख्यमंत्री और जेडी (यू) अध्यक्ष नीतीश कुमार से सुबह के नाश्ते और रात्रि भोज में उनकी मुलाकात तय है। इन दोनों नेताओं की मुलाकात को बिहार की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है।  

यह भी संभावना व्यक्त की जा रही है कि बीजेपी के सत्ता में वापसी के बाद शाह की इस बिहार यात्रा के दौरान न केवल नीतीश से सीट बंटवारे पर चर्चा होगी, बल्कि लोकसभा चुनाव की रणनीतियों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। 

विपक्ष की भी मुलाकात पर नजर 
ऐसे में शाह के इस दौरे पर न केवल बिहार के सत्ता पक्ष के नेताओं की नजर है, बल्कि विपक्ष भी इन नेताओं की मुलाकात पर पैनी निगाह रखे हुए है। 2015 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अमित शाह की यह पहली बिहार यात्रा है। हालांकि, तब और आज के समय में काफी बदलाव आ गया है। 

उस समय जेडी (यू) बीजेपी से अलग महागठबंधन में शामिल थी लेकिन अब बीजेपी के साथ सरकार में है। वैसे, इस दौरान आगामी चुनावों को लेकर बीजेपी और जेडी (यू) के नेता सीट बंटवारे और बड़े भाई-छोटे भाई की भूमिका को लेकर आमने-सामने आते रहे हैं। 

40 में से 25 सीटें मांगी थी जेडी (यू) ने 
दोनों दलों की बयानबाजी के दौरान जेडी (यू) ने यहां तक कह दिया था कि पिछले लोकसभा चुनाव के फॉर्म्युले पर चलते हुए उन्हें 40 में से 25 सीट लड़ने के लिए मिलनी चाहिए। जेडी (यू) ने यह भी कह दिया है कि अगर बीजेपी नहीं मानती है, तो वह 40 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। नीतीश कुमार ने हालांकि सोमवार को भी यह बात स्पष्ट कर दी है कि जेडी (यू) और बीजेपी के बीच में बड़ा भाई बनने की होड़ का कोई सवाल ही नहीं उठता है। 

नीतीश ने जारी की थी सफाई 
नीतीश ने यह भी कहा था कि दोनों दलों के बीच सीटों के तालमेल को लेकर जो बयानबाजी हो रही थी वह बेमतलब है और जब चुनाव की तारीख पास आएगी, तो दोनों दलों के आला नेता बैठकर इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे और मामले का निपटारा कर लेंगे। उल्लेखनीय है कि पिछले लोकसभा चुनाव में जेडी (यू) अकेले चुनाव मैदान में उतरी थी और उसे मात्र दो सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था जबकि बीजेपी को बिहार की 40 में से 22 सीटें मिली थीं। 

'सीट बंटवारा बड़ा मुद्दा नहीं'
वहीं, सहयोगी दलों लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) को क्रमश: छह और तीन सीटें मिली थीं। ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर आरएलएसपी ने भी अधिक सीट पर दावेदारी कर रखी है। इधर, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि सीट बंटवारा कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल सभी दलों के जब दिल मिल गए हैं, तो सीट भी समय आने पर बंट जाएगा। 

विपक्ष की पैनी नजर 
इधर, विपक्ष भी शाह के दौरे पर पैनी नजर बनाए हुए है। गौरतलब है कि आरएलएसपी के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को कई मौके पर महागठबंधन में शामिल होने का न्योता आरजेडी दे चुका है। एनडीए के घटक दलों में सीट बंटवारे को लेकर संभावित झगड़े को लेकर आरजेडी, कांग्रेस के नेता उत्साहित हैं। 

नाराज दल नए ठिकाने खोजेंगे? 
आरजेडी के उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने भविष्यवाणी भी कर दी है कि एलजेपी और आरएलएसपी दोनों महागठबंधन में शामिल होने वाले हैं। बातचीत हो चुकी है। हालांकि, रघुवंश के बयान को पासवान ने खारिज कर दिया है। ऐसे में तय है कि एनडीए में सीट बंटवारे के तय फॉर्म्युले से नाराज दल नए ठिकाने खोजेंगे। बहरहाल, शाह गुरुवार को सुबह करीब 10 बजे पटना पहुंचेंगे और शुक्रवार को सुबह दिल्ली वापस लौट जाएंगे। इस दौरान वह विभिन्न बैठकों में भाग लेंगे। 

Source : Agency