फैज़ाबाद
'हमरी अटरिया पे आओ सवारियां, देखा देखी बलम हुई जाए' जैसी गज़़लों की मल्लिका रही बेगम अख्तर ने गज़़ल केे सिर्फ मायने ही नहीं बदले बल्कि कबीर जायसी और सूफी संतों की गज़़लें और दोहों से दुनिया मे अपनी अलग जगह बनाई यह कहना है बेगम अख्तर की आखरी वह प्रिय शिष्य रेखा सूर्या का जिन्होंने भी दादरी ठुमरी गजल और सूफी संतो की गजलों पर देश ही नहीं विदेश में चार चांद लगा दिए।

जी हां, फैजाबाद डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में गेस्ट बनकर आई गज़़ल गायक का रेखा सूर्या ने पंजाब केसरी से बातचीत में बताया कि उन्हें बेहद खुशी है की बेगम अख्तर के इंतकाल के 44 वर्ष बाद भी उन्हें दिलों में जगह दी जा रही है बल्कि अवध विश्वविद्यालय परिसर में बेगम अख्तर संगीत एकेडमी बनाकर अख्तरी बाई की यादों को संजोया जा रहा है। रेखा सूर्या कहती हैं कि अवध विश्वविद्यालय संगीत एकेडमी बनाकर उन्हें विजिटिंग प्रोफेसर नियुक्त कर संगीत की दुनिया में गज़़ल ठुमरी दादरी को फनकार देना चाहती है । रेखा सूर्या कहते हैं जब वाह पहली बार बेगम अख्तर से मिली तो उनको अख्तरी बाई का तल्ख मिजाज देखने को मिला लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे वैसे हर दिल अजीज अम्मीजान को मैं समझ पाई । लखनऊ घराने को जीवित रख रही गजल गायिका रेखा सूर्या ने यह भी बताया की महफिलों न फनकार के साथ साथ मम्मी अख्तरी बाई बेहद उम्दा पकवान भी बनाया करती थी । 

डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित कहते हैं कि फैजाबाद ही नहीं पूरे देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है अगर अवसर मिले तो नई पीढ़ी बहुत कुछ हासिल कर इस समाज को दे सकती है । सांस्कृतिक परंपराओं की तरह संगीत भी बेहद पुरानी परंपरा है जिसे संजोने के लिए फैजाबाद में ही जन्मी ठुमरी दादरा और गज़़ल गायिका बेगम अख्तर के नाम पर विश्वविद्यालय एक संगीत एकेडमी का निर्माण कर रहा है। कुलपति बताते हैं यूनिवर्सिटी परिसर में 36 एकड़ जमीन पर 951 वर्ग मीटर पर लगभग 7 करो रुपए की धनराशि से बेगम अख्तर संगीत एकेडमी का निर्माण जल्द किया जाना है । अख्तरी बाई के जीवन से संबंधित फिल्में रिकॉर्ड तस्वीरें वह दूसरे प्रकार के संग्रह को भी एकेडमी में एक भव्य म्यूजियम में रखा जाएगा। 60 करोड़ के बजट पर अविवि कुलपति का कहना है कि उत्तर प्रदेश संस्कृति मंत्रालय व दूसरे ट्रस्ट माध्यमो के साथ विवि के कोष से एकेडमी का निर्माण किया जाएगा। 

अवध विश्वविद्यालय में स्थापित हो रही बेगम अख्तर एकेडमी के लिए विश्वविद्यालय जितना प्रयासरत है वही विश्वविद्यालय कार्य परिषद के सदस्य ओमप्रकाश सिंह एकेडमी की रूपरेखा बनाने में निरंतर लगे हुए हैं ,उनका कहना है की संगीत के सात सुरों के आधार पर 7 ब्लॉक बनाए जाएंगे हर ब्लॉक एक दूसरे से इंटरकनेक्ट होगा ,साथ ही प्रस्तावित मॉडल में इंडोर और आउटडोर के तौर पर दो ऑडिटोरियम भी होंगे । ओपी सिंह ने बताया कि एकेडमी में स्नातक डिप्लोमा एस्टर का कोर्स कराया जाएगा इतना ही नहीं बेगम अख्तर के दुर्लभ गजल संगीत तस्वीरों और तमाम शोधों पर शोधार्थी अध्ययन भी कर सकेंगे ।
कौन थी बेगम अख्तरी बाई?
कभी अवध की राजधानी रही फैजाबाद के भदरसा छोटे से कस्बे में ओपन करो का जन्म हुआ। जिसे कोई नहीं जानता था कि एक दिन बेगम अख्तरी बाई फैजाबादी के नाम से पूरे विश्व में ग़ज़ल ठुमरी और दादरा के लिए प्रसिद्ध हो जाएंगी। 7 अक्टूबर 1914 को जन्मी बेगम अख्तर ने गायकी में महारात हासिल की। कला के क्षेत्र में भारत सरकार से उन्हें पद्द्म श्री तथा 1975 में मरणोपरांत पद्द्म भूषण से सम्मानित भी किया गया। बेगम अख्तर को मल्लिका ए ग़ज़ल के नाम से आज दुनिया जानती है । बेहद खुशमिजाज चेहरे के पीछे गमो का साया भी रहा जिसे उन्होंने संगीत की दुनिया मे आकर बदल दिया। देश के कोने कोने में संगीत के उस्तादों से उन्होंने संगीत की शिक्षा ली तो वहीं लखनऊ घराने को उन्होंने आगे बढ़ाया। 14 वर्ष की आयु में उन्होंने पहला स्टेज परफॉर्म कलकत्ता में किया जो काफी मशहूर हुआ। 300 रिकॉर्ड बना चुकी और संगीत से प्रेम कर रही बेगम ने बेरिस्टर इस्तियाक अहमद अब्बासी से निकाह किया जो उन दिनों लखनऊ के बेहतरीन वकीलों में हुआ करते थे। आज भी अखतरीबाई की ग़ज़लों को हर उम्र के साहबान दिलों से जुड़कर बेगम की ग़ज़लों को सुनते हैं। 

Source : Agency