नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद सत्र से पहले सक्रिय हो गए हैं. वे 2019 की सियासी जमीन तैयार करने के साथ-साथ सहयोगी दलों को भी साधने में जुट गए हैं. अगले पांच दिनों 11 जुलाई से 16 जुलाई तक तीन राज्यों में चार रैलियों को वो संबोधित करेंगे. इन रैलियों के जरिए पीएम किसानों से बातचीत के साथ-साथ अकाली दल और अपना दल जैसे सहयोगियों की शिकायतें भी दूर करेंगे.

18 जुलाई से संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो रहा है. मोदी सरकार इस सत्र को बजट सत्र की तरह हंगामे की वजह से गंवाना नहीं चाहती. बजट सत्र के दौरान विपक्षी दलों से ज्यादा एनडीए के सहयोगी दलों ने संसद की कार्यवाही बाधित की थी. सरकार चाहती है कि इस बार कम से कम ऐसा न हो और पूरा एनडीए मजबूती से सरकार के साथ खड़ा हो.पंजाब के मलोट में 11 जुलाई को पीएम मोदी 'कृषि कल्याण' रैली को संबोधित करेंगे. इस दौरान पीएम के साथ अकाली दल के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल भी मंच पर होंगे. अकाली दल ने कुछ दिन पहले बीजेपी को लेकर कुछ तल्खी के संकेत दिए थे. माना जा रहा है कि पीएम के साथ मंच साझा करने से अकाली नेताओं की ये तल्खी कम होगी. इस रैली के जरिए पीएम मोदी पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के एक लाख किसानों को सीधा संदेश देंगे. 

यूपी में अपना दल को साधने, मुलायम को घेरने उतरेंगे पीएम
पंजाब के बाद मोदी का अगला दौरा यूपी में होगा. पीएम 14 जुलाई को यूपी के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास करेंगे. ये लखनऊ को पूर्वांचल के जिले बलिया से जोड़ेगा. इसके बाद वे अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी 15 जुलाई को पहुंचेंगे. मोदी वाराणसी में कैंसर हॉस्पिटल का शिलान्यास करेंगे. इसके अलावा वह नमामि गंगे प्रॉजेक्ट के तहत हो रहे विकास कार्यों और पं. मदन मोहन मालवीय कैंसर सेंटर की मौजूदा स्थिति का जायजा लेंगे. 15 जुलाई को ही पीएम मिर्जापुर में एक रैली को संबोधित करेंगे. इस रैली के जरिए पीएम पटेल समुदाय और सहयोगी अपना दल को साधेंगे. मिर्जापुर अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल का संसदीय क्षेत्र है.

ममता के दुर्ग में कमल खिलाने की कोशिश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 जुलाई को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में 'कृषि कल्याण समावेश' कार्यक्रम के जरिए किसानों को संबोधित करेंगे. पीएम मोदी की रैली का इस क्षेत्र में होने का स्पष्ट संकेत है कि बीजेपी बंगाल में जंगलमहल क्षेत्र के जरिए अपनी जड़ें जमाने की कोशिश में है. जंगलमहल मुख्य रूप से आदिवासी बेल्ट है. इस क्षेत्र के तहत पुरुलिया, बांकुरा और पश्चिम मिदनापुर तीन जिले आते हैं. इन तीन जिलों में छह लोकसभा सीटें हैं, जिनमें से कम से कम चार सीटें आदिवासी और ओबीसी बहुल हैं. बता दें कि बंगाल में हाल ही में हुए पंचायत चुनाव में जंगलमहल क्षेत्र के तहत आने वाली 150 सीटें बीजेपी ने जीती थीं. झारग्राम के कुछ आदिवासी पंचायत क्षेत्रों में बीजेपी के सामने टीएमसी नामांकन दाखिल नहीं कर सकी थी. ऐसे में मोदी आदिवासी क्षेत्र के जरिए बंगाल में कमल खिलाने की जुगत में हैं.
 

Source : agency