जियो इंस्टिट्यूट को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है देश के तमाम नेताओं तथा खिलाड़ियों वह लोगों द्वारा सरकार से मुकेश अंबानी के इस इंस्टिट्यूट को उपकृत करने पर जवाब मांगा जा रहा है, कि इस तरह का कोई इंस्टिट्यूट अभी खुला ही नहीं है और उसे पहले से ही देश के अन्य संस्थानों को छोड़कर दर्जा देने का क्या मतलब है।

 उल्लेखनीय है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सोमवार को छह विश्वविद्यालयों को उत्कृष्ठ संस्थान का दर्जा प्रदान करने की घोषणा की। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बंबई और आईआईएससी बेंगलुरु शामिल हैं। मंत्रालय ने निजी क्षेत्र से मनीपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, बिट्स पिलानी और जियो इंस्टीट्यूट को भी उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा प्रदान किया। इस खबर के आने के बाद Twitter,Facebook और सोशल मीडिया पर मोदी और अंबानी की दोस्ती को लेकर तरह-तरह के कमैंट्स सामने आ रहे हैं तथा दोस्ती की मिसाल दी जा रही है। देश के टॉप 10 इंस्टीट्यूट में जियो इंस्टिट्यूट को शामिल करना ट्रोल का विषय बना हुआ है क्योंकि दृष्ट में बहुतेरे उत्कृष्ट संस्थान हैं जिन्हें इसका लाभ नहीं मिला। Twitter पर प्रियंका गांधी से लेकर मोदी के विरोधी गुजरात के निलंबित आईपीएस संजीव भट्ट ने इसे ट्वीट कर सरकार को घेरने का प्रयास किया है। केंद्रीय मंत्रीप्रकाश जावड़ेकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा जा रहा है कि ऐसा क्या कारण है कि रिलायंस के जियो इंस्टिट्यूट को देश के टॉप 10 उत्कृष्ट इंस्टिट्यूट में जगह मिली। Twitter पर 1000 करोड़ रुपए की इस इंस्टिट्यूट को आर्थिक मदद करने की भी खबरें ट्रेंड कर रही है हलाकि 1000 करोड़ रुपैया सरकार ने अकेले इस इंस्टिट्यूट को नहीं दिया है ऐसा मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सूत्र बताते हैं।

Source : Manish sharma