बेंगलुरु 
कर्नाटक में कुमारस्वामी सरकार के पहले बजट में तेल की कीमतें बढ़ाए जाने के फैसले से केवल आम आदमी ही नहीं नाराज है। प्रदेश की गठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस को भी इस फैसले से आपत्ति है। ऐसा माना जा रहा है कि अगले हफ्ते जब सीएम कुमारस्वामी बजट अप्रूवल के लिए रखेंगे तो कांग्रेस तेल की बढ़ी कीमतों के फैसले को वापस लेने की मांग करेगी।  

अपने बजटीय भाषण में कुमारस्वामी ने पेट्रोल और डीजल पर स्टेट टैक्स 2 फीसदी तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। ऐसा करके कर्नाटक सरकार 34000 करोड़ रुपये की किसान लोन माफी के अपने महत्वाकांक्षी स्कीम के लिए फंड का जुगाड़ करना चाहती है। यह फैसला उस वक्त आया है जब कांग्रेस और अन्य क्षेत्रय दल तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। 

कांग्रेस को चिंता है कि कुमारस्वामी सरकार का यह फैसला उसके इस कैंपेन को बेपटरी कर सकता है। साथ ही इसपर बीजेपी को भी पलटवार का मौका मिल रहा है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि कुमारस्वामी का यह फैसला पार्टी के मजबूत राजनीतिक हथियार को कमजोर कर सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी कुमारस्वामी से इस फैसले को वापस लेने के लिए कहेगी। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि जब लोकसभा चुनाव नजदीक हैं तो एक पार्टी ऐसे गलत फैसले को कैसे बर्दाश्त कर सकती है। 

कर्नाटक सरकार के इस फैसले को लेकर बीजेपी कांग्रेस पर हमलावर हो गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग पार्टी पर निशाना साधते हुए तेल की कीमतों को लेकर मोदी सरकार के उसके विरोध पर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस के कई नेताओं ने दावा किया है कि कुमारस्वामी ने कोऑर्डिनेशन कमिटी की बैठक में तेल की कीमतें बढ़ाने को लेकर कोई चर्चा नहीं की थी। 

प्रीबजट सेशन की गोपनीय बैठक में शामिल जेडीएस के एक वरिष्ठ नेता ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कोऑर्डिनेशन कमिटी की बैठक में इसपर चर्चा नहीं हुई। जेडीएस नेता ने बताया कि कोऑर्डिनेशन कमिटी ने लोन माफी स्कीम को अप्रूव करते हुए सीएम को इसे किसी भी तरह व्यवहारिक बनाने को कहा था। उन्होंने आगे जोड़ा कि हमें भी तेल की कीमतें बढ़ने के फैसले का अनुमान नहीं था। उन्होंने इस बात के संकेत भी दिए कि कुमारस्वामी अगले हफ्ते इस प्रस्ताव को वापस भी ले सकते हैं। 

Source : Agency