पटना

सर्व शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत शिक्षकों के वेतन के लिए राज्य सरकार ने 5000 करोड़ रुपये का एक रिजर्व कोष बनाया है ताकि उनके वेतन भुगतान में कोई दिक्कत नहीं आए। राज्य के शिक्षकों के लिए पहली बार ऐसी व्यवस्था की गई है।
सर्व शिक्षा अभियान का नाम बदलकर 2018-19 से समग्र शिक्षा अभियान कर दिया गया है। इसके तहत कार्यरत प्रारंभिक विद्यालयों (कक्षा एक से आठ तक) के करीब 2.60 लाख शिक्षकों का वेतन भुगतान होता है। इनके वेतन की राशि में केंद्र का हिस्सा 60 तो राज्य सरकार का 40 फीसदी होता है। कई वर्षों से यह देखा जा रहा है कि खासकर अंतिम तिमाही में सर्व शिक्षा अभियान मद में पूरी राशि केंद्र से नहीं मिलने के कारण राज्य सरकार को 100 फीसदी राशि वेतन भुगतान के लिए देना पड़ता है। इसके लिए राज्य सरकार अलग से राशि का प्रबंध करती है।  बाद में विधानमंडल सत्र के दौरान पूरक बजट में इसके लिए राशि का प्रावधान किया जाता है। फिर अतिरिक्त राशि की व्यवस्था कर वेतन भुगतान किया जाता है। अब ऐसी नौबत न आए, इसके लिए रिजर्व कोष बनाया गया है। इस 5000 करोड़ में से 1861 करोड़ खर्च करने की भी अनुमति राज्य सरकार ने दे दी है। 
वेतन भुगतान में होती है देर
केंद्र से राशि समय पर नहीं मिलने के कारण अक्सर वेतन भुगतान में देरी होती है। दो-तीन महीने का वेतन एक साथ भुगतान होता है। इधर शिक्षकों के मार्च, 2018 के बाद का वेतन बकाया है। पिछले दो सालों से बिहार सरकार वेतन मद में अपने हिस्से के अलावा 2000 करोड़ से अधिक राशि इन शिक्षकों के वेतन पर खर्च कर रही है। 
20 जून को होनी है बैठक 
समग्र शिक्षा अभियान के तहत वित्तीय वर्ष 2018-19 में बिहार के लिए कितने बजट का प्रावधान किया जाएगा, इस पर निर्णय 20 जून को दिल्ली में प्रोजेक्ट एप्रूवल बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद बजट का प्रस्ताव तैयार कर दिल्ली ले जाएगा। 

Source : Agency