भोपाल
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसइ) की स्वच्छता रैकिंग में भोपाल को तीसरा नंबर मिला है। केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत सर्वे के बाद सीएसई ने सर्वे कराया था। केंद्र के सर्वे से अपडेट इस सर्वे में कचरा कलेक्शन के साथ उसके सेग्रीगेशन पर रैंकिंग तय की गई।

देश के पंद्रह राज्यों के 26 शहर इसमें शामिल थे। इसमें इंदौर का पहला स्थान बरकरार रहा, लेकिन भोपाल दूसरे पायदान से खिसककर तीसरे नंबर पर आ गया। भोपाल से पहले मैसूर को स्थान दिया गया। गौरतलब है कि मैसूर पहले स्वच्छ भारत सर्वे में पहले स्थान पर आया था।

हाल ही में दिल्ली में सीएसइ ने ये रैकिंग जारी की है। भोपाल को 54 अंक ही मिले हैं, जबकि इंदौर को 81 अंक दिए गए। सभी शहरों के प्रतिनिधियों को इसके सर्टिफिकेट दिए गए। भोपाल से सहायक स्वास्थ्य अधिकारी राकेश शर्मा ने दिल्ली जाकर सर्टिफिकेट लिया।

ऐसे किया आकलन : कचरा उत्पन्न होने वाली जगह पर ही उसका कितना सेग्रीगेशन हो जाता है
कचरा कलेक्शन, परिवहन की क्षमता और प्रोसेसिंग कैसे
लैंडफिल साइट पर कचरे के डिस्पोजल की व्यवस्था
सॉलिड और प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट का पालन
बायो-मेडिकल वेस्ट के ट्रीटमेंट की सुविधा क्या है
इ-वेस्ट कलेक्शन व ट्रीटमेंट की क्या सुविधा है

भोपाल की रैंकिंग इन कारणों से फिसली : 50 प्रतिशत कचरा सेग्रीगेट की क्षमता
90 प्रतिशत वेस्ट कलेक्शन क्षमता
90 प्रतिशत से अधिक ट्रांसपोर्टेशन क्षमता
50 प्रतिशतगीला कचरा प्रोसेसिंग क्षमता
50 प्रतिशत ही सूखा कचरा प्रोसेसिंग हो पा रहा है
33 प्रतिशतसे भी कम है कचरे की डिसेंट्रलाइज प्रोसेसिंग
75 प्रतिशत कचरा ही लैंडफिल साइट डिस्पोज किया जा रहा है

आज के समय में कचरे की डिसेंट्रलाइज प्रोसेसिंग और उसमें अधिकतम सेग्रीगेशन जरूरी हो गया है। कचरे का लंबा परिवहन, लैंडफिल साइट अब उचित नहीं है। हमने सर्वे किया तो छोटे से लेकर बड़े शहरों में इसे लेकर बेहतर काम हो रहा है, जो उत्साहवर्धक है।
- चंद्रभूषण, डिप्टी डायरेक्टर जनरल, सीएसइ

Source : Agency