झज्जर 
इसे कुदरत का करिश्मा कहें या फिर डॉक्टरों की लापरवाही कि एक 80 साल के बुजुर्ग को मृत घोषित करने के बाद वह फिर जिंदा हो उठा। हार्ट अटैक आने के बाद उन्हें परिजनों ने एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था।  
 
यह वाकया हरियाणा के बहादुरगढ़ के एक निजी अस्पताल का है। बादली सब-डिविजन के बुपनिया गांव के रहने वाले 80 वर्षीय राजमिस्त्री सुरते को हार्ट अटैक आने पर अस्पताल में भर्ती किया गया था। यहां कुछ समय वेंटिलेटर पर रखने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। साथ ही परिजनों से उनकी डेडबॉडी ले जाने को कह दिया। लेकिन रात का समय होने के कारण परिजनों ने कहा कि वह सुबह यहां से उनका शव ले जाएंगे। 

अंतिम संस्कार की कर ली थीं सारी तैयारियां 
अगले दिन अल-सुबह डेडबॉडी ले जाने की बात कहकर कुछ परिजन घर लौट गए। कुछ वहीं अस्पताल में ही रहे। परिजनों ने सभी सगे संबंधियों को भी सुरते के मरने की खबर दे दी। इसके बाद उनके अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां कर ली गईं। 

इसके बाद अगले दिन सुबह जब परिजन डेडबॉडी लेने अस्पताल पहुंचे, तो अचानक सुरते की सांसें चलने लगीं। वह उठकर बैठ गए। यह नजारा देख डॉक्टरों के चेहरे से हवाइयां उड़ने लगीं। वहीं, शोकाकुल परिजन हैरान हो गए। सभी के चेहरे पर खुशी दिखने लगी। 

सुरते को यह तीसरा अटैक पड़ा था 
परिजन सत्यनारायण ने बताया कि सुरते को यह तीसरा अटैक पड़ा था। उनके मरने की खबर सुनने के बाद उन्होंने अस्पताल का 30 हजार रुपये के बिल का भुगतान भी कर दिया था। लेकिन भगवान की कृपा से वह दोबारा जिंदा हो गए। उन्होंने बताया कि सुरते अभी ठीक हैं। 

'वेंटिलेटर से हटने के बाद सांस दोबारा आना, रेयर ऑफ रेयरेस्ट है' 
झज्जर सिविल हॉस्पिटल के डॉक्टर संजीव का कहना है कि रोगी का हार्ट पंप करना बंद कर देता है, तो उसे वेंटिलेटर से उतारा जाता है। अगर इसके बाद भी मरीज की सांस दोबारा आती है, तो यह कुदरती प्रक्रिया ही है। 

एक अन्य विशेषज्ञ डॉ. सरदाना का कहना है कि ऐसा अक्सर तो नहीं पर एक या दो पर्सेंट मामलों में हो सकता है कि वेंटिलेटर से उतरने के बाद भी मनुष्य की सांस दोबारा आ जाए, हालांकि वह भी इसे कुदरत का करिश्मा ही बताते हैं। 

Source : Agency