नई दिल्ली
पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम ने सोमवार को भाजपा पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की 'प्रशासनिक अक्षमता' और 'नीतिगत चूक' के चलते देश में कृषि संकट, बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था की समस्या खड़ी हुई है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, 'किसानों की निराशा गुस्से में बदल गई है और वे विरोध के लिए सड़कों पर उतर आए हैं.' उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर बात करते हुए भाजपा की निंदा की. चिदंबरम ने कहा कि कृषि उपज और कृषि श्रम की कमतर मजदूरी का प्रमुख कारण अनौपचारिक मूल्य है. एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर्याप्त नहीं है. हर किसान यह जानता है कि एमएसपी लागत का 50 फीसदी का वादा मात्र एक जुमला है. चिदंबरम ने इस दौरान आरबीआई की उस रिपोर्ट का भी जिक्र‍ क्रिया, जिसमें बताया गया है कि 48 फीसदी लोग मानते हैं कि अर्थव्यवस्था की हालत पिछले 12 महीनों में बदतर हुई है. सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने यह भी कहा कि देश में बेरोजगारी बढ़ी है, जो भाजपा के एक साल में दो करोड़ रोजगार देने के वादे से बिल्कुल अलग है.

चिदंबरम ने यह भी सवाल उठाया कि अक्टूबर-दिसंबर 2017 के लिए श्रम ब्यूरो के सर्वेक्षण को जारी क्यों नहीं किया गया? चिदंबरम ने कहा कि नोटबंदी के कारण 2015-16 में विकास दर 8.2 प्रतिशत से घटकर 2017-18 में 6.7 प्रतिशत रह गई. तमिलनाडु सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि 2017-18 के दौरान राज्य में 50,000 छोटे कारोबारियों की इकाइयां बंद हो गईं. पांच लाख नौकरियां छिन गईं और एमएसएमई क्षेत्र में पूंजीगत निवेश में 11,000 करोड़ रुपये की गिरावट आई है. चिदंबरम ने कहा कि त्रुटिपूर्ण वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की वजह से व्यापार का प्रभावित होना लगातार जारी है. उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा कानूनों और कार्यक्रमों को भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने उपेक्षित किया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम भी लागू नहीं किया गया. बमुश्किल 30 फीसदी किसानों को ही फसल बीमा का लाभ मिल रहा है. यह बीमा कंपनियों के लिए अप्रत्याशित है. वही स्वास्थ्य सुरक्षा योजना भी केवल जुमला है.

Source : agency