उत्तरी दीनाजपुर
पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के एक पीठासीन अधिकारी का क्षतविक्षत शव उत्तरी दीनाजपुर में रेलवे ट्रैक से मिला है. पीठासीन अधिकारी की पहचान राजकुमार रॉय के तौर पर हुई है. राजकुमार का सोमवार को पंचायत चुनाव के लिए मतदान के बाद से ही कोई पता नहीं चल रहा था. चुनाव आयोग की ओर से राजकुमार की ड्यूटी इताहार के सोनापुर प्राइमरी स्कूल बूथ पर चुनाव अधिकारी के तौर पर लगाई गई थी. राजकुमार के सहयोगियों का कहना है कि उन्होंने राजकुमार को सोमवार को शाम 4 बजे बूथ पर आखिरी बार देखा था तब पोलिंग खत्म होने को कुछ ही वक्त बचा था.

सोमवार रात राजकुमार जब अपने घर पर नहीं पहुंचे और ना ही फोन पर कोई जवाब दे रहे थे तो घरवालों को फिक्र हुई. राजकुमार के घर वाले सोमवार देर रात को ही इताहार पहुंच गए. बीडीओ के पास राजकुमार का अता-पता नहीं चलने की शिकायत दर्ज कराई गई. साथ ही उनके मोबाइल टॉवर का लोकेशन जानने के लिए अधिकारियों की मदद ली गई. स्कूल में अंग्रेजी के टीचर राजकुमार ने सोमवार को आखिरी बार पत्नी से शाम को 7.45 बजे बात की थी. आखिरकार मंगलवार शाम को राजकुमार का शव सोनाडांगी में रेलवे ट्रैक के पास मिला. ये जगह उस बूथ से 20 किलोमीटर दूर थी, जहां राजकुमार की चुनाव ड्यूटी लगी थी. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के साथ अप्राकृतिक मौत का केस दर्ज किया है.

डीएसपी श्याम सिंह ने बताया, ‘हमने ये केस सीआईडी को देने का फैसला किया है. प्रारंभिक जांच से पता चला है कि उस दिन संबंधित बूथ पर कोई गड़बड़ नहीं हुई थी, वहां मतदान पूरी तरह शांतिपूर्वक हुआ था. हमने बूथ पर तैनात अन्य चुनावकर्मियों से भी बात की है. सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर बहुत कुछ भ्रामक फैलाया जा रहा है जो कि सही नहीं है.’ रायगंज में जिलाधिकारी आएशा रानी के मुताबिक सोनारपुर जीआरपी की ओर से उस दिन हादसे की सूचना दिए जाने के बाद राजकुमार को ट्रेस किया गया. आयशा रानी ने इंडिया टुडे से कहा, ‘हमने पोलिंग पार्टी से बात की. उन्होंने हमें बताया कि रॉय मतदान खत्म होने से पहले ही बूथ को छोड़कर चले गए थे. सोनारपुर जीआरपी की ओर से हादसे की सूचना दी गई. तलाश किए जाने पर जब एक शव मिला तो उसकी पहचान राजकुमार के तौर पर हुई.’

राजकुमार का शव मिलने की जैसे ही सूचना मिली क्षेत्र में तैनात मतदान कर्मचारियों ने विरोध जताना शुरू कर दिया. एक जगह SDO उन्हें शांत करने के इरादे से पहुंचा तो उसके साथ हाथापाई की गई. जिलाधिकारी को जब ये जानकारी मिली तो तैनात सभी मतदान कर्मचारियों को हटा कर दूसरे रिजर्व कर्मचारियों को तैनात कर दिया.

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