17 मई 2018 से भारत में रमज़ान का महीना शुरू हो गया है. इस समय में रोज़ा 16 घंटे के करीब का होगा. 33 डिग्री गर्मी में 16 घंटे भूखा, प्यासा रहना आसान नहीं है लेकिन रोजे के दौरान थोड़ी सावधानी बरतकर खुद को कमज़ोरी से बचाया जा सकता है.

ऐसा खाना खाएं, जो शरीर में पानी की कमी को पूरा कर सके. किन चीजों में कितना न्यूट्रिशन होता है और कितना सेवन करना चाहिए, ये जानना जरूरी है. प्रोटीन लेने के बाद प्यास ज्यादा लगती है. प्रोटीनयुक्त भोजन जैसे दाल, नॉनवेज, तेज मसालेदार भोजन से बचें.

प्रोटीनयुक्त भोजन की जगह विटामिन और मिनरल्स का इस्तेमाल करें. ताजे फल, सब्जियां, खजूर खाएं. प्यास कम लगेगी. इफ्तार के दौरान दही जरूर खाएं.

छोटी इलायची के दाने पीसकर, उसके पाउडर को दही या खीर में डालकर सहरी के वक्त ज़रूर लें. इससे गले में ठंडक रहेगी. कोशिश करें सहरी में एक रोटी ज़रूर खाएं. इससे दिन भर पेट में कुछ टिका रहेगा. सिर्फ पानी पीने से उस समय सब्र आएगा. लेकिन दिनभर पेट खाली रहेगा. सहरी में खूब सारा तरल पदार्थ लेंगे तो दिन में डीहाइड्रेशन का शिकार नहीं बनेंगे. सहरी में ऐसे फल भी खाएं, जिनसे पानी की कमी न हो.

डायबिटीज़ रोगियों के लिए डायट प्लान
रोजे के दौरान मधुमेह से पीड़ित लोगों का ब्‍लड शुगर काफी नीचे, ऊपर होता रहता है. वे अपनी डायट का खास ख्याल रखें. इफतार के समय आराम से वरना ब्लड शुगर अचानक से बढ़ सकता है. हो सकता है आमतौर पर काम आने वाला इंसुलिन काम ना करे. प्री मिक्स इंसुलिन का प्रयोग ना करें. ग्लूकोज लेवल को दिन में कई बार चेक करें. शाम को ज्यादा कैलोरी वाली एवं तली हुई चीजें नहीं खाएं. रेशे की प्रचुरता वाले खाद्य पदार्थ खाने चाहिए.

रमजान के दौरान मधुमेह पीड़ित रोजेदारों को हाइपोग्लाइसीमिया (रक्त शर्करा स्तर में अचानक गिरावट) का सामना करना पड़ सकता है, जो दौरे एवं बेहोशी या अचानक रक्त शर्करा बढ़ने का सबब बन सकती है. इंसुलिन लेने वाले मरीज रोजे से परहेज करें. एक दिन में करीब 15-16 घंटों तक कुछ भी न खाने से शर्करा निम्न स्तर पर पहुंच सकता है.

Source : Agency