पटना

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने एक बार फिर तेजस्वी यादव पर निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट करके कहा कि कर्नाटक की जनता ने जब धर्म के नाम पर बांटकर सत्ता पाने की कोशिश को नकार दिया, तब ईवीएम पर सवाल उठाए जाने लगे हैं. अब कांग्रेस धमकी दे रही है कि यदि राज्यपाल ने उसे अल्पमत के बावजूद सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया, तो खूनी संघर्ष होगा. क्या डॉक्टर मनमोहन सिंह इस भाषा पर राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखेंगे?

सुशील मोदी ने कहा कि बिहार में जब पूर्व के महागठबंधन को 2015 में स्पष्ट बहुमत मिला था, तब राज्यपाल ने उसके पहले से घोषित नेता को सरकार बनाने के लिए बुलाने में कोई देर नहीं की थी. जुलाई 2017 में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर गठबंधन टूटने से बनी विषम परिस्थिति में राज्यपाल ने विवेक-सम्मत निर्णय कर संविधान की रक्षा की. उन्होंने तेजस्वी पर हमला बोलते हुए कहा कि बेनामी सम्पत्ति के चलते सत्ता गंवाने वाले लोग कर्नाटक से अपनी तुलना क्यों कर रहे हैं?

सुशील मोदी ने कहा कि अटल पेंशन योजना में शामिल असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की संख्या तीन साल के भीतर 1 करोड़ से ज्यादा हो गई और इसका सर्वाधिक लाभ बिहार-यूपी के लोगों ने उठाया. राज्य के 10 लाख 61 हजार मजदूरों ने अटल पेंशन योजना का लाभ लेकर कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र को पीछे छोड़ दिया. एनडीए सरकार ने देश के मजदूरों को सबसे सस्ती बीमा सुरक्षा प्रदान की.

बता दें कि बिहार में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया था कि बीजेपी कर्नाटक में हॉर्स ट्रेड्रिंग को बढ़ावा दे रही है. उन्होंने कर्नाटक में मचे सियासी घमासान पर बुधवार को कहा कि बीजेपी लोकतंत्र में एक ख़तरनाक परिपाटी स्थापित कर रही है. हर मामले में चित भी इनका पट भी इनका.

आरजेडी नेता ने कहा था कि बीजेपी गोवा मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना कर चुकी है. अगर सबसे बड़ी पार्टी को कर्नाटक के राज्यपाल सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं तो वह राष्ट्रपति से एक अनुरोध करना चाहते हैं. उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की कि कर्नाटक की तर्ज पर बिहार में सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका दिया जाए.

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