बेंगलुरु 

बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा ने गुरुवार की सुबह 9 बजे राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. राज्यपाल वजुभाई वाला ने सुबह नौ बजे राजभवन में कड़ी सुरक्षा और व्यवस्था के बीच येदियुरप्पा को शपथ दिलाई. येदियुरप्पा ने तीसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली है.

येदियुरप्पा (75) ने बीजेपी के केंद्रीय और राज्य के नेताओं और नवनिर्वाचित विधायकों के बीच कन्नड़ भाषा में शपथ ली. इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ ने येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.

शपथ ग्रहण के बाद येदियुरप्पा विधानसभा परिसर पहुंचे हैं. केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार समेत पार्टी के कई नेता उनके साथ पहुंचे. येदिरप्पा ने बिल्कुल उसी अंदाज में विधानसभा परिसर में एंट्री की जैसे 2014 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद नरेंद्र मोदी ने संसद में माथा टेकते हुए प्रवेश किया था. येदियुरप्पा ने सीढीयों को चूमते हुए विधानसभा में एंट्री की.

इससे पहले राजभवन आते वक्त येदियुरप्पा ने रास्ते में राधा-कृष्ण मंदिर में दर्शन पूजन किया. राजभवन पहुंचते ही येदियुरप्पा ने बीजेपी नेताओं सहित राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी से मुलाकात की.

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक येदियुरप्पा शपथ ग्रहण समारोह के बाद सदन में बहुमत साबित करने की तारीख का ऐलान कर सकते हैं.

येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण को लेकर बीजेपी मुख्यालय और उनके आवास पर जश्न का माहौल रहा. परंपरागत नृत्य और गाने बाजे के साथ पार्टी समर्थकों का हुजूम पार्टी मुख्यालय पर लगा रहा.

बीजेपी के लिए अहम स्पीकर 
खासकर बीजेपी के लिए और भी जरूरी है क्योंकि उसके पास बहुमत से केवल 8 सीटें कम हैं। जब पार्टी 113 के आंकड़े को छूने की कोशिश करेगी, विपक्ष के कुछ विधायकों को या तो इस्तीफा देना होगा या उसके पक्ष में आना होगा। इसलिए पार्टी के लिए यह जरूरी हो जाता है कि स्पीकर बीजेपी की पसंद का हो। 

स्पीकर के हाथ कई अधिकार 
ऐंटी-डिफेक्शन लॉ के तहत शिकायतों पर सुनवाई करने और ऐक्शन लेने में स्पीकर की बड़ी भूमिका होती है। कई मामलों में देखा गया है कि विधायकों ने पार्टी विप के खिलाफ जाकर वोट किया लेकिन स्पीकर तुरंत उस बारे में कुछ नहीं किया। स्पीकर के लिए समयसीमा की बाधा नहीं होती। इसलिए वह जब तक चाहे मुद्दे को लटकाकर रख सकता है। 

पहले फ्लोर टेस्ट पर नजर 
दोनों पार्टियां फिलहाल कह रही हैं कि उनकी कोशिश रहेगी कि किसी निष्पक्ष व्यक्ति को स्पीकर बनाया जाए। स्पीकर चुने जाने को ही सबसे पहला फ्लोर टेस्ट माना जा रहा है। हालांकि, विधायकों की जोड़-तोड़ की संभावना को देखते पार्टियों की यह भी कोशिश होगी कि नया स्पीकर बहुमत साबित करने की प्रक्रिया में उनका साथ दे। 

Source : Agency