छतरपुर
आज के वक्त में यदि लोग किसी भी रहस्यमयी चीज को देखते हैं तो सबसे पहले उसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों को जानने का प्रयास करते हैं, लेकिन भारत के मध्यप्रदेश राज्य के छतरपुर जिले में स्थित ऐतिहासिक भीमकुंड को आज तक कोई भी वैज्ञानिक कारण नहीं मिल पाता है। भीमकुंड आज भी वैज्ञानिकों के लिए अबूझ पहेली बना हुआ है। भीमकुंड के बारे में कहा जाता है कि इसकी गहराई आज तक कोई नहीं जान सका है। इस कुंड का जल भी साफ और पीने योग्य है।

इस कुंड के बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि जब भी दुनिया में कोई प्राकृतिक विपत्ति आने वाली होती है तो यह कुंड पहले ही संकेत दे देता है। बताया जाता है जब हिन्द महासागर में 2004 में आये भूकंप और सुनामी का संकेत इस कुंड ने पहले दें थी।

भीमकुंड का उल्लेख भारत के वैदिक ग्रंथ और पुराणों में भी किया गया है। कहा जाता है कि महाभारत के पांच पांडवों और द्रोपदी का मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड से गहरा नाता रहा है। कहा जाता है कि उन्होंने अपने अज्ञातवास का कुछ समय इस क्षेत्र में बिताया था। जिस जगह उनके रहने के प्रमाण मिलते हैं। वह छतरपुर जिले में भीमकुंड के नाम से जाना जाता है। पर्यटन प्रेमियों के लिए यह एक रमणीक जबकि इतिहास और प्रकृति पर शोध करने वालों के लिए यह रहस्मयी स्थान है।

भीमकुंड के बारे में कहा जाता है कि यह भीम के गदा के प्रहार से बना था। मान्यताओं के अनुसार जब अज्ञातवास के समय जंगल में जब द्रोपदी को प्यास लगी तो उन्होंने भीम से पानी लाने को कहा। भीम ने वहां एक स्थान पर अपनी गदा से पूरी ताकत से प्रहार किया तो वहां पाताली कुंड निर्मित हुआ और अथाह जल राशि नजर आई जिसके बाद से इसका नाम भीमकुंड हो गया।

भीम कुंड की गहराई आज भी रहस्मय बनी हुई है। आज तक इसकी गहराई कोई नहीं नाप सका। कई लोगों ने कई तरह से इसकी गहराई नापने का प्रयास किया पर असफल रहे। माना जाता है कि जहां कुंड है वह जमीन के अंदर से प्रवाहित प्रबल जलधारा के कारण बना है पर इस बारे में आज तक कोई भू-जल वैज्ञानिक यह पता नहीं कर सका कि आखिर यह जलधारा किस जल स्रोत से जुड़ी है।

अपने आप में अद्भुत यह रहस्मयी कुंड कई कारणों से लोगों की जिज्ञासा और शोध का केंद्र रहा है। सुनामी आपदा के समय इस कुंड में करीब 80 फीट तक ऊंची लहरें उठी थीं। जिसके बाद से यह देश- विदेश की मीडिया की सुर्खियां बना था।

सुनामी के समय इसमें लहरें उठने के बाद डिस्कवरी चैनल की टीम इसका रहस्य जानने आई थी। उनके गोताखोरों ने कई बार इसके कुंड में गोता लगाए थे पर वे न तो इसकी गहराई माप सके और न यह पता कर सके कि इसमें सुनामी के समय लहरें उठने का क्या कारण था अलबत्ता उन्हें इसकी गहराई में कुछ विचित्र और लुप्त प्राय जलीय जीव-जंतु देखने को जरूर मिले थे।

Source : Agency