बिलासपुर
शहर के वेस्ट वाटर नाली और सीवरेज के पानी से अब एनटीपीसी बिजली पैदा करने में उपयोग करेगा। शासन स्तर पर हुई बैठक में 25 अप्रैल तक निगम को एग्रीमेंट तैयार करने के लिए कहा गया है। इसके बाद पीपीपी मॉडल पर टेंडर किया जाएगा।

बड़ी औद्योगिक इकाई जहां फैक्ट्री कार्य में पानी की जरूरत पड़ती है उसके लिए फिलहाल बांध के पानी का उपयोग किया जाता है। जिसे फिल्टर करके पेयजल के लिए भी उपयोग किया जा सकता है। ऐसे में तय हुआ है कि औद्योगिक कार्य के शहरी वेस्ट पानी का उपयोग किया जाए।

इसके लिए नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव रोहित यादव ने शासन स्तर के अधिकारियों के अलावा एनटीपीसी प्रबंधन और निगम आयुक्त की संयुक्त बैठक राजधानी में ली। इसमें एनटीपीसी प्रबंधन ने नाली का पानी उपयोग करने पर सहमति दे दी है। इसके अलावा उनका यह कहना था कि पानी का एग्रीमेंट करने के लिए उन्हें अपने उच्च कार्यालय से अनुमति लेनी पड़ेगी।

ऐसे में निगम को एग्रीमेंट का मसौदा तैयार करके एनटीपीसी को देने के लिए कहा गया है। इस एग्रीमेंट पर एनटीपीसी विचार विमर्श कर अपनी सहमति देगा। निगम के साथ अनुबंध होने के बाद इस कार्य को पीपीपी मॉडल पर कराने के लिए टेंडर जारी किया जाएगा।

प्रोजेक्ट में खर्च होने वाले 200 करोड़ रुपये ठेकेदार ही खर्च करेगा। गंदा पानी को एनटीपीसी तक पहुंचाने का काम भी उसका होगा। बदले में एनटीपीसी ठेकेदार को अनुबंध के अनुसार राशि देगा। ठेकेदार के मुनाफे में निगम का भी हिस्सा रहेगा। मतलब साफ है कि अब की बार बिना कोई राशि खर्च किए निगम नाली के पानी से पैसा कमाने की योजना पर काम कर रहा है।

ऐसे चलेगा प्रोजेक्ट

अरपा नदी के दोनों किनारे पर पाइप लाइन बिछाई जाएगी। नाली का पानी इन पाइप लाइनों से बहते हुए सीधे मटियारी पहुंचेगा। जहां आरओ फिल्टर तकनीक से पानी को साफ किया जाएगा। सर्वे के अनुसार 56 एमएलडी गंदा पानी फिल्टर करने का प्लांट इसके लिए लगेगा। साफ होने के बाद इस पानी को एनटीपीसी प्लांट सीपत तक पाइप लाइनों के जरिए पहुंचाया जाएगा। इसका उपयोग औद्योगिक कार्य में होगा।

200 करोड़ आएगा खर्च

नाली के पानी को फिल्टर करने का प्लान कंसलटेंट कंपनी ब्लू स्ट्रीम ने तैयार किया है। उनके अनुसार पूरे प्रोजेक्ट में 200 करोड़ रुपये खर्च आएगा। एनटीपीसी को 25 साल तक फिल्टर नाली के पानी को लेने का अनुबंध करना होगा। ऐसा हुआ तो शुद्घ पानी की काफी बचत होगी।

- पूरे प्रोजेक्ट में खास बात यह है कि इसके लिए निगम को कोई राशि खर्च नहीं करनी है। इसके अलावा नाली के पानी से दूषित हो रही अरपा नदी को भी बचाया जा सकेगा। निगम को भी इससे कुछ आमदनी होगी वह अलग। पीपीपी मॉडल का टेंडर करने के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी। - सौमिल रंजन चौबे, आयुक्त, नगर निगम

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