भिलाई
 भिलाई के प्रख्यात ड्रमर व आक्टोपेड वादक, जिन्होंने दुनिया के कोने-कोने में अपनी ड्रम की धुन पर लोगों को नचाया है। जिन्होंने भारत के दिग्गज गायकों के साथ संगत की। जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय सम्मान सहित उपराष्ट्रपति के हाथों पुरस्कृत किया जा चुका है। जिन्होंने 35 घंटे तक लगातार आक्टोपेड बजाया। जिनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।

हम बात कर रहे है दीपांकर दास की। दीपांकर दास के पिता एसके दास बंगाल से भिलाई आए थे। यहीं प्लांट में नौकरी की। दीपांकर भिलाई में ही जन्मे,पले बढ़े। भिलाई को बढ़ते नजदीक से देखा। महसूस किया। भिलाई में 12 तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने दुर्ग साइंस कालेज से बीएससी की।

दीपांकर बताते हैं कि शुरू से संगीत में ही मन रमता था। इसलिए ड्रम की बिसारत हासिल करने इंदिरा कला एवं संगीत महाविद्यालय खैरागढ़ चले गए। वहीं ड्रम की तालीम हासिल की। 1985 में वेस्टर्न क्लासिकल में डिग्री हासिल की। प्रेनेटी स्कूल ऑफ लंदन से ड्रम में डिप्लोमा किया।

ड्रम बजाने के पीछे की कहानी बताते हुए दीपांकर कहते हैं कि अपने जमाने की मशहूर नृत्यांगन सीतारा देवी के पुत्र रंजीत दरोट को मुंबई में उन्होंने ड्रम बजाते देखा व सुना था। रंजीत दरोट दुनिया के सबसे बड़े ड्रमर माने जाते हैं। तब से उन्हें ही गुरु, आदर्श व प्रेरणा मान लिया। ठान लिया कि भविष्य में ड्रमर ही बनना है।

दीपांकर दास को ड्रम बजाते आज 43 साल बीत गए। इस दौरान उन्होंने देश के कोने-कोने में ड्रम की थीम से लोगों को मंत्रमुग्ध तो किया ही, विदेशों में भी लोगों को खूब थिरकाया। बीएसपी के संस्कृति एवं कला विभाग में कार्यरत दीपांकर दास दुबई, ओमान, इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं।

हाल में प्रख्यात भजन गायक प्रभंजय चतुर्वेदी के साथ आक्टोपेड बजाने वाले दीपांकर दास बताते हैं कि उनके द्वारा अब तक सोनू निगम, कैलाश खेर, कविता कृष्णमूर्ति, शान के साथ प्रस्तुत दे चुके है।

इसमें कैलाश खेर व कविता कृष्णमूर्ति के साथ जुगलबंदी करना सबसे अच्छा अनुभव रहा। दीपांकर कहते हैं कि उनके द्वारा भिलाई के कई बच्चों को ड्रम का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनकी चाहत है कि भिलाई के बच्चे ड्रम में महारत हासिल कर पूरी दुनिया में भिलाई का नाम रौशन करें।

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