नई दिल्ली
देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स से दिल्ली पुलिस ने एक फर्जी डॉक्टर को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार 19 वर्षीय अदनान खुर्रम खुद को एम्स का डॉक्टर बताता था. आरोपी बिहार का रहने वाला है और बताया जा रहा है कि फिलहाल ये दिल्ली के जामिया नजर में रहता था.

6 महीने से कर रहा था गुमराह

दिल्ली पुलिस के मुताबिक पिछले 6 महीने से इस लड़के का एम्स में आना-जाना था. यही नहीं, किसी को शक ना इसलिए ये एम्स के डॉक्टरों की डायरी लेकर घूमता था. 6 महीने में इसकी एम्स के कई डॉक्टरों से काफी जान पहचान भी हो गई थी. आरोपी अदनान फर्जी डॉक्टर बनकर कई लोगों के इलाज करवा कर दूसरी सुविधाएं भी ले चुका है.
पूछताछ में कई खुलासे

पुलिस से पूछताछ में इस लड़के ने बताया कि इसकी बहन एम्स में भर्ती है और उसका ब्लड कैंसर का इलाज चल रहा है. अस्पताल में बहन को ज्यादा मदद मिले इसलिए उसके अंदर फर्जी डॉक्टर बनने का आइडिया आया. दिल्ली पुलिस की जांच में पता चला है कि खुर्रम ने अपनी असली पहचान छुपाकर मेडिकल छात्रों से दोस्ती बनाई और अस्पताल के कर्मचारियों से भी नजदीकी बढ़ाई.
इस खुलासे के बाद एम्स डॉक्टर एसोसिएशन ने बताया कि पिछले दिनों खुर्रम ने डॉक्टरों के कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. हड़ताल से लेकर मैराथन में भी आरोपी नजर आया था. दिल्ली पुलिस ने इस फर्जी डॉक्टर को शनिवार को गिरफ्तार किया. इसकी मेडिकल जानकारी और विभागाध्यक्ष और एम्स के डॉक्टरों के नाम सुनकर पुलिस भी दंग रह गई.

आरोपी लगातार बदल रहा है बयान

रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी की पहुंच उस मेडिकल डायरी तक भी थी, जो डॉक्टरों को दी जाती है. पुलिस जांच में जुटी है कि आरोपी के हाथ ये डायरी कैसे लगी. हालांकि पुलिस से पूछताछ में खुर्रम लगातार अपना बयान बदल रहा है. क्योंकि दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद सबसे पहले खुर्रम ने बताया कि उसने एक बीमार परिवार को एम्स में जल्द दाखिला दिलाने के लिए ऐसा किया. दूसरा कारण उसने गिनाया कि उसे मेडिकल का पेशा काफी पसंद है और वह डॉक्टरों के साथ वक्त बिताना चाहता था.

एम्स कैंपस में हड़कंप

वहीं आरडीए अध्यक्ष हरजीत सिंह ने बताया कि उन्हें तब संदेह हुआ जब उन्होंने खुर्रम को कैंपस में इधर-उधर घूमते पाया. हरजीत सिंह की मानें तो खुर्रम हमेशा लैब कोट पहने, गले में स्टेथोस्कोप लटकाए कैंपस में रहता था. उन्होंने बताया कि आरोपी की चाल-ढाल से कोई उस पर शक नहीं कर पा रहा था. एम्स में लगभग 2 हजार रेजिडेंट डॉक्टर हैं जिन्हें पहचानना मुश्किल काम है. खुर्रम इसी का नाजायज फायदा उठाता था. उसे शनिवार को एक मैराथन के दौरान गिरफ्तार किया गया जब सीनियर डॉक्टरों ने उसकी पहचान जाननी चाही. इसमें वह नाकाम रहा, फिर डॉक्टरों ने उसे पुलिस को सौंप दिया.
पुलिस की शुरुआती जांच में खुर्रम के खिलाफ अबतक कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं हैं. इसके खिलाफ धारा 468 (फर्जीवाड़ा) और 419 (बहरूपिए का अपराध) के तहत मामला दर्ज किया गया है. सोशल मीडिया पर खुर्रम ने लैब कोट पहने अपनी ढेर सारी तस्वीरें अपलोड कर रखी थीं.

Source : Agency