कोलकाता 
कोलकाता में आईटी प्रफेशन में काम करने वाली एक 28 वर्षीय कर्मचारी को हाल ही में एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों को तेज चेस्ट पेन से जूझ रही युवती के प्राथमिक लक्षण हार्ट अटैक के लक्षण दिखे। टेस्ट में ब्लड पम्पिंग में कोई भी ब्लॉक नहीं पाया गया। इसके बाद डॉक्टरों ने युवती में ताकोत्सुबो सिंड्रोम की पुष्टि की।

जापानी ताकोत्सुबो सिंड्रोम, हार्ट फेल्योर का अचानक और तेजी से आया फॉर्म है। इसके लक्षण हार्ट अटैक के समान ही हैं, जिसमें- चेस्ट पेन, सांस लेने में रुकावट शामिल है। हार्ट मसल्स अचानक से कमजोर हो जाता है और हार्ट का लेफ्ट वेन्ट्रिकल चैम्बर अपना आकार बदल लेता है। 

ये हैं इसके लक्षण 
इससे ब्लड पम्प करने की हार्ट की क्षमता प्रभावित होती है। इस बीमारी की सबसे पहले जापान में 90 के दशक में खोजा गया था। जापानी नागरिकों की जल्दी मौत के प्रमुख कारणों का जिम्मेदार इसी बीमारी को माना गया। 

विशेषज्ञों के अनुसार ताकोत्सुबो बीमारी सामान्य तौर पर उन लोगों में होता है, जो भावनात्मक और शारीरिक तनाव से गुजर रहे होते हैं। कार्डियोलॉजिस्ट विनायक देव के अनुसार, 'इन दिनों युवा महिलाओं में इस बीमारी से सबसे अधिक प्रभावित होने की संभावना रहती है। इसके लिए तनाव को कम करना ही ज्यादा असरकारक है, बजाय कि दवाओं पर निर्भर रहने के। खुशनुमा माहौल बनाए रखना और ध्यान करने से भी बीमारी नियंत्रण में रहती है।' 
 

Source : Agency