आजकल वास्तु का प्रचलन बहुत बढ़ गया है, जब भी कोई अपना घर बनवाता या खरीदता है तो पहले उसके वास्तु का पता करता है। अगर घर का निर्माण वास्तु को ध्यान में रखकर नहीं किया जाए तो वहां रहने वाले लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिस घर में वास्तुदोष होता है उस घर के सदस्यों को न तो सुख मिलता है और न ही शांति मिलती है।

ऐसे में घर का निर्माण वास्तु के अनुसार ही किया जाना चाहिए। वास्तु अनुसार किए गए निर्माण से आपके घर में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बना रहता है और नकारात्मक ऊर्जा घर से दूर रहती है। अगर घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास हो तो घर में सुख और समृद्धि आती है। हम आपको यहां घर के दक्षिणी भाग के वास्तु के बारे में जानकारी दे रहे हैं.

घर के दक्षिणी भाग के वास्तु को सही रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जिस घर का दक्षिणी भाग खाली हो उस घर में वास्तुदोष उत्पन्न हो जाता है। ये वास्तुदोष घर के स्वामी को काफी परेशान करता है और उसके धनागम के सभी रास्ते बंद हो जाते हैं।

इसके साथ ही परिवार के सदस्यों के बीच झगड़ा होने लगता है जिससे घर में तनाव और अशांति का वातावरण व्याप्त हो जाता है। इस भाग के वास्तुदोष से बचने के लिए घर के इस स्थान को कभी भी खाली नहीं छोड़ना चाहिए। वास्तुशास्त्र के अनुसार अगर इस स्थान पर कुछ रखना संभव न हो तो इस जगह पर स्वास्तिक चिन्ह बना दें। स्वास्तिक चिन्ह बनाने से इस दिशा के वास्तुदोष से छुटकारा मिलता है।

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