यहाँ होते है भगवान के साक्षात् दर्शन…!!!


जगत के पालनहार कहे जाने वाले श्री हरी विष्णु (Vishnu) के वैसे तो बहुत से मंदिर है जो अपने आप में प्रसिद्ध है आज हम आपको उनके कुछ खास प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बता रहें है, तो आइये जानते है:

बद्रीनाथ मंदिर

    ये अलकनंदा नदी के किनारे उत्तराखंड राज्य में स्थित है।
    यह मंदिर भगवान विष्णु (Vishnu) के रूप बद्रीनाथ को समर्पित है।
    यह हिन्दुओं के चार धाम में से एक धाम भी है।

    ऋषिकेश से यह 294 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर दिशा में स्थित है।
    ये पंच-बदरी में से एक बद्री हैं।
    यह भगवान विष्णु (Vishnu) को समर्पित 108 मंदिरों (दिव्य देसम) में शामिल है, जिनका तमिल संतों ने छठी से 9वीं शताब्दी के बीच उल्लेख किया था।

जगन्नाथ पुरी मंदिर

    श्री जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Puri Mandir) एक हिन्दू मंदिर है।
    भगवान विष्णु (Vishnu) के एक रूप श्री जगन्नाथ अर्थात श्रीकृष्ण (Krishna) को समर्पित है।
    यह भारत के ओडिशा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है।
    जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है।
    यह वैष्णव सम्प्रदाय का मंदिर है।
    यह मंदिर भी वैष्णवो के ‘चार धाम’ में शामिल है।

रंगनाथ स्वामी मंदिर

    रंगनाथ स्वामी (Rangnath Swamy) मंदिर श्रीरंगम में स्थित हिन्दुओं का एक पवित्र धार्मिक स्थल है।
    यह मंदिर कावेरी नदी के तट पर स्थित है।
    यहां विष्णु (Vishnu) जी की पूजा श्री रंगनाथन के रूप में की जाती है।
    इसे भूलोक का वैकुंठ या भगवान विष्णुजी का धाम भी कहा जाता है।
    रंगानाथ स्वामी श्री हरि के विशेष मंदिरों में से एक है।
    कहा जाता है श्री राम (Ram) ने लंका से लौटने के बाद यहां पूजा की थी।


वेंकटेश्वर मंदिर

    तिरुपति (Tirupati) वेन्कटेशवर मन्दिर तिरुपति में स्थित एक प्रसिद्ध हिन्दू मन्दिर है।
    तिरुपति भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है।
    यह आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित है।
    समुद्र तल से 3200 फीट ऊंचाई पर स्थित तिरुमला की पहाड़ियों पर बना श्री वैंकटेश्वर मंदिर यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है।
    यह भगवान विष्णु (Vishnu) के सबसे पुराने और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है।

द्वारिकाधीश मंदिर

    यह मंदिर श्री कृष्ण (Krishna) को समर्पित है।
    माना जाता है द्वारिकाधीश लगभग 2000 साल पुराना मंदिर है।
    किंवदंती है कि इस मंदिर को भगवान कृष्ण (Krishna) के पोते वज्रनाभ ने बनवाया था।
    यह इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि द्वारिका में है, जो श्री कृष्ण की कर्मस्थली मानी जाती है।
    द्वारिकाधीश भी ‘चार धाम’ में से एक है।
    यह सात पुरियों में एक पुरी है, इसीलिए इसका नाम द्वारका (Dwarka) पुरी से रखा गया है।
    यह नगरी भारत के पश्चिम में समुंद्र के किनारे पर बसी है।

Source : Agency