मुंबई। पचास के दशक में 'नया दौर' और 'धूल का फूल' जैसी चर्चित फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में लोकप्रिय हुई वरिष्ठ अभिनेत्री डेजी ईराणी के साथ उम्र के छठवें साल में बलात्कार हुआ था। फिल्म की शूटिंग के दौरान परिवार के साथ करीबी संबंध रखने वाले एक व्यक्ति ने उनके साथ बलात्कार किया था। यह खुलासा करने के साथ डेजी ईराणी ने बॉलीवुड के काले अध्याय को उजागर किया है। 

डेजी ईराणी की मुलाकात मुंबई के एक अखबार ने छापी है। सफेद छक्क बाल, बड़ी आंखों वाली, किसी गुड़िया सी दिखने वाली डेजी ईराणी ने 'नया दौर', धूल का फूल' जैसी अनेक फिल्मों में राजकपूर, दिलीपकुमार, देवआनंद, मीनाकुमारी जैसे कलाकारों के साथ बाल कलाकार के रूप में काम किया था। अभिनेता फरहान अख्तर और जोया अख्तर की वे मौसी हैं। आज करीब 60 सालों बाद उन्होंने उस घटना का खुलासा किया। फिलहाल, कई बाल कलाकार छोटे और बड़े पर्दे पर दिखाई पड़ते हैं। उन्हें लोकप्रियता भी मिलती है। इस कारण उनके माता-पिता भी बड़े विश्वास से उन्हें फिल्मों में भूजना चाहते हैं पर उनकी सुरक्षा की चिंता ऐसे माता-पिताओं को खास तौर पर लेना चाहिए, यह बताने के लिए ही 'मुंबई मिरर' को मुलाकात दी। वो व्यक्ति अब जीवित नहीं है। वो चला गया, उसका नाम नजीर था। सुप्रसिद्ध गायिका जौहराबाई अंबाला वाली का वो रिश्तेदार था। इस कारण उसके फिल्मी दुनिया में अच्छे संबंध थे। 

डेजी ईराणी ने बताया कि मेरी मां को किसी भी हाल में फिल्म स्टार होते देखना था। मैंने मराठी फिल्म 'बेबी से फिल्मी दुनिया में पदार्पण किया। मद्रास में 'हम पंछी एक डाल के' इस फिल्म की शूटिंग शुरू थी। उस वक्त नजीर मेरे साथ था। उस रात्रि होटल में वो रूम में आया और बलात्कार करने के बाद उसने मुझे पट्टे से मारा। उसने घटना के बारे में किसी को नही बताने के लिए धमकी भी दी। तब मैं बहुत घबरा गई थी। मुझे वो पूरा वाकिया टुकड़े-टुकड़े में याद आता है पर वो जानलेवा पीड़ा आज भी मुझे आज भी जस की तस याद है। 

बलात्कार के बाद दूसरे दिन मैंने जैसे कुछ हुआ ही नहीं, चेहरे पर ये भाव लेकर स्टुडियो में पहुंची। नजीर ने क्या किया, यह मां को बताने की हिम्मत कई वर्षों तक मुझमें नहीं आई। बाद में जैसे-जैसे बड़ी होती गई, वैसे-वैसे मैं इंसानों को पहचानती चली गई। इस कारण मैंने लोगों को फ्लर्ट करना शुरू किया। मैं उन पर फिकरे कसने लगी। मुझे यह भी नहीं पता होता था कि मैं क्या कर रही हूं। वक्त के साथ मैं भी बदल रही थी। कुछ बरस बाद मेरी मां को मेरे साथ हुए बलात्कार के बारे में समझ में आया पर हम क्या कर सकते थे? यह सवाल भी उन्होंने किया। 

'मैं जब 15 वर्ष की हुई तब मेरी मां ने मुझे साड़ी और पेडेड स्पांज पहनाकर निर्माता मलिकचंद कोचर के पास भिजवाया था। उस वक्त वो 'मेरे हुजूर' फिल्म में बिजी थे। उनका कार्यालय मराठा मंदिर के पास ताडदेव सर्कल पर था। उन्होंने सोफे पर मेरे बाजू में बैठकर मुझे स्पर्श करना शुरू किया। मुझे पता था कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है? तब मैंने स्पंज निकाल कर उनके हाथ में दे दिया था। इस कारण वो मुझ पर गुस्सा हो गए थे। 

Source : desk