मुंबई

महाराष्ट्र के वरिष्ठ भाजपा नेता एकनाथ खड़से ने एक बार फिर अपनी ही सरकार पर सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए चूहे मारने के टेंडर में घोटाले का आरोप लगाया.

उन्होंने विधानसभा में एक आरटीआई का हवाला देते हुए कहा कि सरकार एक सप्ताह के भीतर तीन लाख 19 हजार चार सौ चूहे मारे जाने का दावा कर रही है. रोजाना नौ टन से ज्यादा यदि चूहे मारे गए हैं तो उन्हें आखिर कैसे ठिकाने लगाया गया.

खड़से ने इस मामले की जांच की मांग की है. खडसे ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि चूहे मरने के टेंडर में घोटाले हुए हैं और जिन विभागों से यह टेंडर पास किया गया वह सभी टेंडर मुख्यमंत्री के अधीन चलने वाले सामान्य प्रशासन विभाग और गृहविभाग के अधीन हैं.

एक माह में मंत्रालय ने मार दिए 3 लाख 19 हजार चूहे?

खड़से ने मुंबई महानगर पालिका का हवाला देते हुए कहा कि मुंबई मनपा दो साल में छह लाख चूहे मारती है. वहीं, छोटे से मंत्रालय में एक सप्ताह के भीतर यानी 3 मई 2016 से 10 मई 2016 तक तीन लाख 19 हजार चार सौ चूहे मारने का कारनामा कर दिखाया.

ये आरोप भी लगाए खड़से ने...  

खड़से यही नहीं रुके. उन्होंने आरोप लगाया कि जिस कंपनी को चूहे मारने का टेंडर दिया गया उसने 7 दिन में 3 लाख से ज्यादा चूहे कैसे मार दिए. इस काम में तो 6 माह का समय भी कम पड़ जाता है.

खड़से ने आगे सवाल किया कि जिस कंपनी को चूहे मारने का ठेका मिला था उसके पास मंत्रालय में जहर लाने की अनुमति नहीं थी. गृह विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग की अनुमति के बिना जहर आखिर मंत्रालय में कैसे लाया गया?

उन्होंने कहा, इसका मतलब है कि एक दिन में 45,628.57 चूहे मारे गए। मतलब कंपनी ने हर मिनट 31.68 चूहे मारे। उनमें 0.57 अवश्य ही नवजात रहे होंगे। खडसे के इस बयान पर सदन में ठहाके गूंज उठे। हालांकि खडसे यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, 'चो चूहे मारे गए हैं, उनका वजन करीब 9,125.71 किग्रा रहा होगा और मरे हुए चूहों को मंत्रालय से ले जाने के लिए रोजाना एक ट्रक की जरूरत पड़ी होगी। लेकिन यह नहीं पता कि उन्हें कहां फेंका गया।' 

'इससे अच्छा 10 बिल्लयां रख लेते' 
पूर्व राजस्व मंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि सरकार एक कंपनी को यह काम सौंपने की बजाए इस काम के लिए 10 बिल्लियों को लगा सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रालय के परिसर में कंपनी द्वारा रखे गए जहर को खाकर धर्मा पाटिल नाम के एक किसान ने फरवरी में आत्महत्या कर ली थी। 

मंत्रालय में खा लिया था जहर 
बता दें कि पाटिल ने भूमि अधिग्रहण को लेकर मुआवजा दिए जाने में अन्याय होने का आरोप लगाते हुए मंत्रालय में जहर खा लिया था और कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई थी। खडसे ने कहा कि इस बारे में कोई सूचना नहीं है कि क्या कंपनी को जहर का इस्तेमाल करने की इजाजत थी, या नहीं। उन्होंने जांच की मांग करते हुए कहा कि यह बहुत आश्चर्यजनक है कि इस कंपनी ने महज 7 दिनों में तीन लाख से अधिक चूहों को मार दिया। 

Source : Agency