नई दिल्ली 
आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की मांग ने ऐसा सियासी रंग दिखाया कि टीडीपी नेता और राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के सामने नौबत आ गई कि उन्हें और उनकी पार्टी को एनडीए से अलग होना पड़ा। पहले यह मुद्दा आंध्र की राजनीति तक ही था, लेकिन अब यह राष्ट्रीय रूप ले चुका है। आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की कवायद लंबे समय से चली आ रही है। इसी मांग को लेकर वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी ने अपना कार्ड चला। नेल्लोर में अपनी पैदलयात्रा के दौरान जगनमोहन रेड्डी ने कहा था कि अगर केंद्र ने आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया तो उनकी पार्टी के सांसद 6 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।

जगनमोहन के पास 5 लोकसभा सांसद और एक राज्यसभा मेंबर का साथ होने की वजह से किसी ने इस धमकी को उस वक्त गंभीरता से नहीं लिया था। किसी को भी अंदाजा नहीं था कि जगनमोहन की इस धमकी की वजह से राष्ट्रीय स्तर पर कोई राजनीतिक कठिनाई आएगी। वहीं, कुछ दिनों बाद जगन ने कहा कि उनकी पार्टी एनडीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आएगी। 

जगन की धमकियों से हिली आंध्र की राजनीति 
जगन की इन दोनों धमकियों ने आंध्र प्रदेश में राजनीतिक जड़ों को हिलाकर रख दिया, जिसकी कंपन दिल्ली तक महसूस की गई। जगनमोहन ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए ऐसा पासा फेंका, जिसमें तेलुगूदेशम पार्टी के नेता और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू फंस गए। कुछ ही दिनों में नायडू को पता चल गया कि उनके प्रतिद्वंद्वी ने आंध्र को विशेष दर्जा दिलाने को लेकर उनके साथ चाल चली है। इसकी वजह से ही नायडू को स्पेशल कैटिगरी स्टेट्स (विशेष राज्य का दर्जा) का मुद्दा उठाना पड़ा ताकि अगले चुनावों में मतदाता उन्हें ही चुनें। नायडू जगनमोहन रेड्डी के साथ राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को समझ गए थे। 

वहीं, पिछले हफ्ते ही चंद्रबाबू नायडू ने एनडीए सरकार से अपने दो मंत्रियों को अलग कर लिया था और शुक्रवार को उन्होंने अपनी पार्टी को बीजेपी से अलग करने का ऐलान किया। शुक्रवार को ही तेलुगूदेशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस एनडीए के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए एक-दूसरे को टक्कर देते दिखे। खुद को दूसरे से बेहतर दिखाने की होड़ में वाईएसआर और टीडीपी को अहसास हो गया कि यह मुद्दा आंध्र के लोगों के लिए अहम मुद्दा है और इसी के बलबूते वह भारी वोट पा सकते हैं। इस स्थिति को देख कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों ही पार्टी अविश्वास प्रस्ताव लाने से एक-दूसरे को रोक सकती हैं। वहीं विपक्षी पार्टी टीडीपी और वाईएसआर के बीच मेल-मिलाप कराने की कोशिश कर सकती हैं, ताकि एक ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जाए। 

Source : Agency