वॉशिंगटन 
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन को हटाकर सीआईए निदेशक माइक पोम्पियो को नया विदेश मंत्री नियुक्त किया। ट्रंप के इस अचानक फैसले ने सभी को चौंकाया तो जरूर, लेकिन इस कदम को पाकिस्तान के नज़रिए से बड़ा कदम माना जा रहा है। दरअसल पाकिस्तान को लेकर माइक पोम्पियो का रवैया काफी कड़ा रहा है। इस साल जनवरी में भी पोम्पियो ने पाकिस्तान को फटकार लगाते हुए कहा था कि अगर उसने आतंकवाद को खत्म नहीं किया तो फिर अमेरिका अपना कदम उठाने पर मजबूर हो जाएगा।

 
पाकिस्तान पर कड़क पोम्पियो 
अमेरिका ने आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को हमेशा ही फटकार लगाई है। ट्रंप ने साल (2018) की शुरुआत में घोषणा की थी कि पाकिस्तान को तब तक किसी भी तरह की मदद नहीं दी जाएगी, जब तक वह अपने यहां पल रहे आतंक का जड़ से सफाया नहीं कर देता। इसके बाद ट्रंप ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य मदद के अलावा बाकी सुरक्षा संबंधी मदद भी बंद कर दी थी। ट्रंप के इस फैसले पर टिलरसन का नरम रवैया था। पाकिस्तान में आतंकवाद को नेस्तनाबूद करने की चुनौती के बावजूद पाकिस्तान के कान पर जूं तक नहीं रेंगी और जमात-उद-दावा जैसे आतंकी संगठन आराम से सक्रिय रहे। इस आतंकी संगठन का सरगना हाफिज सईद को अब राजनीति में एंट्री भी मिल गई है। 

दक्षिण एशिया नीति के पक्षधर पोम्पियो 
सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि दक्षिण एशिया नीति और अफगानिस्तान को लेकर भी टिलरसन का नरम रवैया देखने को मिला था। अमेरिका अफगानिस्तान में भारत की भूमिका को और विस्तार देने की नीति को मजबूत बनाना चाहता था। इतना ही नहीं, भारत अमेरिका की दक्षिण एशिया नीति का अहम हिस्सा रहा है। इस नीति के जरिए अमेरिका ने पाकिस्तान को यह संदेश देने की कोशिश की थी कि अब वह कमजोर हो चुका है। 

भारत के लिए नई उम्मीद पोम्पियो 
पोम्पियो के विदेश मंत्री बन जाने से भारत की भी उम्मीदें बढ़ी हैं। गौरतलब है कि आतंकवाद को लेकर अमेरिका और भारत हमेशा ही एकजुट रहे हैं। भारत, अमेरिका की कई नीतियों का हिस्सा रहा है। उम्मीद लगाई जा रही है कि पोम्पियो का रवैया पाकिस्तान पर और कड़क होगा। 

Source : Agency