मुंबई
देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले की जड़ लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बड़ा फैसला लिया है। आरबीआई ने बैंकों को LoU जारी करने से रोक दिया है। अरबपति जूलर नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चौकसी ने इसी जरिए ही देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक में 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले को अंजाम दिया।

आरबीआई ने कहा कि ट्रेड फाइनैंस के लिए LoU और लेटर ऑफ कंफर्ट (LoCs) के इस्तेमाल को रोकने वाला फैसला तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। सेंट्रल बैंक ने एक नोटिफिकेशन में कहा, 'मौजूदा दिशानिर्देशों की समीक्षा के बाद भारत में आयात के लिए LoUs/LoCs जारी करने पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जा रही है।'

पंजाब नैशनल बैंक ने यह जानकारी दी थी कि विदेशों से सामान मंगाने के नाम पर धोखाधड़ी वाले LoUs के जरिए 12,967 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया। इसके बाद CBI और ED सहित कई एजेंसियों ने पीएनबी घोटाले की जांच शुरू कर दी थी।

आरबीआई के नोटिफिकेशन में आगे कहा गया है कि भारत में आयात के लिए ट्रेड क्रेडिट, लेटर ऑफ क्रेडिट और बैंक गारंटीज प्रावधानों के तहत जारी की जा सकती है।

क्या है LoU
लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक खातेदार को पैसा मुहैया करा देते हैं। व्यापारी इसका इस्तेमाल विदेशों से सामान आयात करने के लिए करते हैं। यदि खातेदार डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाए का भुगतान करे।

लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के जरिए कैसे हुआ फ्रॉड
पीएनबी के कर्मचारियों ने घोटाले को आरोपियों के साथ मिलकर फर्जी तरीके से स्विफ्ट प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल करके नीरव मोदी और मेहुल चौकसी की कंपनियों के पक्ष में एलओयू के मेसेज भेजे। विदेशों में बैंकों की शाखाओं के लिए स्विफ्ट मसेज एक गारिंटी की तरह से होते हैं, जिसके आधार पर बैंक मेसेज में जिस बेनिफिशरी का नाम लिखा होता है उसे कर्ज मुहैया करवाते हैं।

Source : Agency