इंदौर
देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने बचत खातों में औसत मासिक रकम नहीं रखने पर जुर्माने की रकम करीब 75% तक कम कर दी है, तो दूसरी तरफ सूचना के अधिकार (आरटीआई) से खुलासा हुआ है कि न्यूनतम जमा राशि नहीं रखे जाने पर बैंक ने करीब 41.16 लाख खाते बंद कर दिए हैं। ग्राहकों से जुर्माना वसूली के प्रावधान के कारण मौजूदा वित्तीय वर्ष के शुरुआती 10 महीनों (अप्रैल-जनवरी) के दौरान देश के सबसे बड़े बैंक ने इन खातों को बंद किया है।

मध्यप्रदेश के नीमच निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने बताया कि उनकी आरटीआई अर्जी पर एसबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें 28 फरवरी को भेजे लेटर में यह जानकारी दी। इस लेटर में बताया गया कि न्यूनतम जमा राशि उपलब्ध नहीं होने पर दंड शुल्क लगाने के प्रावधान के कारण स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा वित्तीय वर्ष 2017-18 में 31 जनवरी तक बंद किए गए बचत खातों की संख्या लगभग 41.16 लाख है।

मिनिमम बैलेंस नहीं रखे जाने पर जुर्माना वसूली के कारण एसबीआई में बहुत बड़ी तादाद में बचत खातों के बंद होने की चौंकाने वाली जानकारी मंगलवार को उस वक्त सामने आई, जब देश के सबसे बड़े बैंक ने इस मद में जुर्माने को 1 अप्रैल से 75 प्रतिशत तक घटाने का अहम फैसला किया है। देश में गरीब तबके के लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने के सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान के बीच खासकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा इस मद में जुर्माना वसूली को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है।

गौड़ ने कहा, 'अगर एसबीआई इस मद में जुर्माने की रकम को घटाने का निर्णय समय रहते कर लेता, तो उसे 41.16 लाख बचत खातों से हाथ नहीं धोना पड़ता। इसके साथ ही इन खाताधारकों को परेशानी नहीं होती जिनमें बड़ी तादाद में गरीब लोग शामिल रहे होंगे।'

Source : Agency