इस माह की 18 तारीख को गुड़ी पड़वा है। भारतीय संस्कृति के अनुसार इस दिन से नया साल शुरू होता है। इसे चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भी कहा जाता है।

कई भारतीय धर्मग्रंथों में इस दिन का महत्व बताया गया है। लिखा गया है कि इसी दिन बृह्माजी ने सृष्टि रूपी चक्र घुमाया था। इससे ग्रहों और नक्षत्रों में परिवर्तन शुरू हुआ था।

जिस दिन भगवान ने ऐसा किया था, उस दिन तिथि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा और वार रविवार था। खास बात यह है इस बार भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रविवार है। इस कारण इस नववर्ष को शुभ बताया जा रहा है।


इस दिन हिंदू नववर्ष मनाए जाने के पीछे यह तर्क भी दिया जाता है कि नई फसल घर मेंआने का समय भी यही है। यह नवजीवन का समय है। पेड़-पौधों में भी नव जीवन आता है। फूल और नई कलियां इसी समय आना शुरू होती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु का प्रथम अवतार हुआ था। नवरात्र की शुरुअात इसी दिन से होती है। वैष्णव दर्शन में चैत्र मास भगवान नारायण का ही रूप है।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि के ठीक नवें दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ थाष आर्यसमाज की स्थापना भी इसी दिन हुई थी।

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