नई दिल्ली 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पश्चिमी एशियाई देशों की यात्रा ने भारत को क्षेत्रीय ऑइल स्टोरेज और व्यापरिक केंद्र बनाने का रास्ता साफ कर दिया है। अबू धाबी नैशनल ऑइल कंपनी (ADNOC) अपना कच्चा तेल भारत में स्टोर करने को राजी हो गई है। भारत के किसी ऑइल प्रॉजेक्ट में यूएई की तरफ से किया जाना वाला यह पहला निवेश होगा। तेल का उत्पादन करने वाले पश्चिमी एशियाई देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों में इसे एक नया मोड़ माना जा रहा है।

सरकारी कंपनी भारतीय स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम स्टोरेज लिमिडेट (ISPRL) ने ADNOC के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जिसके तहत मेंगलुरु में कच्चे तेल को स्टोर किया जाएगा। इससे संबंधित डील जनवरी 2017 में हुई थी, जब अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने आए थे। उसके बाद से दोनों पक्ष इस डील की बारिकियों पर काम कर रहे थे। इसमें ADNOC द्वारा आसान टैक्स नीति की मांग भी शामिल थी। अब पीएम मोदी के दौरे में इस डील को फाइनल कर दिया गया है। 

अबू धाबी की कंपनी 5, 860, 000 मिलियन बैरल कच्चा तेल मेंगलुरु में स्टोर करेगी। इस तेल का कुछ हिस्सा कंपनी अपने ग्राहकों को सप्लाई करने के लिए इस्तेमाल करेगी, जबकि बाकी तेल को किसी प्राकृतिक आपदा जैसी आपात स्थिति के लिए बचाकर रखा जाएगा। बता दें कि ISPRL के मेंगलुरु स्थित स्टोरेज में दो कंपार्टमेंट हैं। दोनों की कुल क्षमता डेढ़ मिलियन टन है। इनमें से एक कंपार्टमेंट को केंद्र से मिले फंड से खरीदे गए कच्चे तेल से भरा जा चुका है। 

इस डील के तहत कच्चे तेल के स्टोरेज से जहां भारत की ऊर्जा सुरक्षा में इजाफा होगा, वहीं आर्थिक दृष्टि से भी इस प्रॉजेक्ट को काफी फायदा होगा। दूसरी तरफ ADNOC भारत और तेजी से विकसित हो रहीं दक्षिण एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में बाजार की मांग को ज्यादा बेहतर तरीके से पूरी कर पाएगी। बता दें कि भारत पश्चिमी एशिया के तेल आपूर्ति करने वाले देशों को अपना रणीनितक निवेशक बनाने की मंशा रखता है। यह डील उस दिशा में काफी मददगार साबित होगी। 

Source : Agency