शिवरात्रि इस बार 13 फरवरी को देशभर में मनाई जा रही है। मतांतर से कुछ लोग 14 फरवरी को भी शिवरात्रि का पूजन एवं व्रत करेंगे। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को गंगा जल चढ़ाने से विशेष पुण्य मिलता है।
 
पूजन सामग्री के लिए वैसे तो कहा जाता है कि फूल, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, गन्ने का रस, दही, घी, शहद, गंगा जल, कपूर, धूप, दीप, चंदन, पांच फल, पांच मेवा, पांच रस, इत्र, गंध रोली, मौली, जनेऊ, पांच तरह की मिठाई, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री आदि से षोडशोपचार के साथ पूजा करनी चाहिए।

मगर, यदि आपके पास ये चीजें नहीं भी हों, तो भी भोलेनाथ प्रसन्न हो सकते हैं। यदि व्यक्ति अपनी पूर्ण श्रद्धा से बेल का पत्र, या अक्षत के चार दाने ही भोलेनाथ पर चढ़ाए, तो भी देवों के देव महादेव प्रसन्न हो जाते हैं। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराकर 'ॐ नमः शिवायः' मंत्र का जाप करना चाहिए।

इसलिए हैं देवों के देव

शिव पुराण कथा के अनुसार, शिव ही ऐसे भगवान हैं, जो शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों को मनचाहा वर दे देते हैं। वे अपने सभी भक्तों का कल्याण करते हैं, फिर चाहें उनकी पूजा करने वाला इंसान हो, राक्षस हो, या भूत-प्रेत। महादेव को प्रसन्न करना सबसे आसान है।

 
शिवलिंग की महिमा बताते हुए कहा कि शिवलिंग में मात्र जल चढ़ाकर या बेलपत्र अर्पित करके भी शिव को प्रसन्न किया जा सकता है। उनकी पूजा के लिए किसी विशेष पूजन विधि की आवश्यकता नहीं है। जरूरी है, तो महज भाव और श्रद्धा।

भगवान शिव को अगर आप चावल के मात्र 4 दाने भी भाव से अर्पित करें तो वे प्रसन्न होकर वरदान देते हैं। उन्हें एक कलश शीतल जलधारा भी प्रसन्न कर देती है। एक धतूरा, एक आंकड़ा, एक बेर, एक संतरा भी उन्हें प्रसन्न कर सकता है। जरूरी नहीं कि आपके पास सभी चीजें हो, जरूरी यह है कि जो भी हो उसे पूरे भक्ति भाव से अर्पित किया जाए।

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