बेंगलुरु 
बीजेपी के पोस्टर बॉय और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्नाटक यात्रा से राज्य में धार्मिक ध्रुवीकरण तेज हो गया है। सीएम योगी की यह चुनावी यात्रा जहां सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए चिंता का सबब बन गई है, वहीं कर्नाटक में सत्ता में वापसी के सपने देख रही बीजेपी ने उन्हें स्टार प्रचारक बनाने का फैसला किया है।

बीजेपी के शीर्ष सूत्रों ने बताया कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीएम योगी को स्टार प्रचारक बनाने का निर्णय लिया है। इसी के तहत योगी अब तक दो बार कर्नाटक की यात्रा पर आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश बीजेपी द्वारा हुबली और बेंगलुरु में आयोजित परिवर्तन यात्रा सभा में योगी ने शानदार भाषण दिया था। इन रैलियों की रिपोर्ट मिलने के बाद पीएम मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बेहद खुश हो गए। इसके परिणामस्वरूप अब यूपी के सीएम पूरे कर्नाटक में जोरदार तरीके से चुनाव प्रचार करेंगे। 

सभी जिलों में रैली 
कर्नाटक में कुल 30 जिले हैं और चुनाव के समय में हरेक जिले में उनकी रैली होगी। इसके बाद वह प्रतिष्ठित तलूक केंद्र और कई विधानसभा क्षेत्रों में भी रैलियां करेंगे। इस प्रकार बीजेपी के आलाकमान ने योगी आदित्यनाथ के जरिए दक्षिण भारत के गेटवे में कमल खिलाने रणनीति बनाई है। बता दें, योगी को हिंदुत्व का फायर ब्रैंड नेता माना जाता है। अब योगी आदित्यनाथ भी कर्नाटक के चुनावी मैदान को केसरियां समुन्दर में बदलने के लिए तैयार हैं। 

सीएम योगी ने 5 जनवरी को दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से शिष्टाचार भेंट की थी। वह उत्तर प्रदेश में होने वाले निवेश सम्मलेन के बारे में सलाह लेना चाहते थे लेकिन इसी दौरान प्रधानमंत्री ने कर्नाटक और त्रिपुरा विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बारे में उनसे चर्चा की। पीएम मोदी ने योगी को कर्नाटक में अधिक ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिया। 

योगी की रैली से दबाव में कांग्रेस 
बीजेपी के सूत्रों ने बताया कि इसके बाद 7 जनवरी को योगी बेंगलुरु रैली में शामिल हुए और राज्य की कांग्रेस सरकार के खिलाफ तीखे हमले किए। योगी के दमदार भाषण से प्रदेश बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता जहां उत्साहित हो गए, वहीं कांग्रेस दबाव में आ गई। बताया जा रहा है कि इसी कारण से कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया गुस्से में हैं। 

इसी की काट के लिए सिद्धारमैया लगातार न केवल योगी और बीजेपी के खिलाफ हमले बोल रहे हैं, बल्कि खुद को हिंदू भी बता रहे हैं। उन्होंने कहना शुरू कर दिया है कि उनके नाम (सिद्धारमैया) में राम हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार राज्य में पहली बार धर्म के आधार पर इतनी गंभीर स्थिति पैदा हुई है। 

योगी को क्यों मिली महत्वपूर्ण भूमिका? 
दरअसल, इसी साल होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी बीजेपी के नंबर एक स्टार प्रचारक होंगे। पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह भी रैलियां करेंगे लेकिन योगी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने के पीछे भगवाकरण की रणनीति है। योगी एक संत हैं और यहां के आदिचुंचनगिरि महासंस्थान मठ के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। उनका गोरखनाथ मंदिर नाथ परंपरा से जुड़ा हुआ है और आदिचुंचनगिरि भी इसी परंपरा को मानने वाला मठ है। केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा भी ट्वीट कर इसी तथ्य को रेखांकित कर चुके हैं। 

बेंगलुरु, मैसूरु सहित कम से कम 10 जिलों में वोक्कालिगा (गौड़ास) समुदाय की आबादी अधिक है। इस बेल्ट में बीजेपी का प्रदर्शन अभी भी बहुत कमजोर है। इसलिए बीजेपी को उम्मीद है कि वह योगी के बल पर इस क्षेत्र में मतदाताओं को अपने पाले में ला सकेगी। बेंगलुरु रैली के दौरान योगी ने अदिचुंचनगिरि मठ में विश्राम किया था। संस्थान के निर्मलानंदनाथ स्वामीजी के साथ पूजा भी की थी। एक बार अमित शाह भी स्वामीजी से मिले थे। 

राज्य के अलग-अलग मठों और मंदिरों के क्षेत्र में योगी काफी लोकप्रिय हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि बीजेपी इसका फायदा लेने का प्रयास जरूर करेगी। हुबली में भी स्थानीय मठ में योगी आदित्यनाथ ने विश्राम किया था। तटीय और पहाड़ी (मलनाड) कर्नाटक में संघ परिवार का संगठन मजबूत है। मंगलुरु को तो हिंदुत्व की प्रयोगशाला कहा जाता है। हुबली-धारवाड़ सहित 7 जिलों में बीजेपी की पकड़ मजबूत है। ऐसी चर्चा है कि अलग लिंगायत धर्म और महादायी नदी विवाद के कारण बीजेपी को थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन योगी के प्रचार से इन सभी को एकजुट किया जा सकता है। 

Source : Agency