पुणे
पुणे के पिम्परी चिंचवाड इलाके में दुल्हन बनी 15 साल की सविता (बदला हुआ नाम) के परिजन और समुदाय की पंचायत के मुखिया सहित कई लोगों का घर के बाहर जमावड़ा लगा हुआ है। कुछ देर के बाद 40 साल का दूल्हा गुस्से में बाहर आकर सफेद चादर दिखाते हुए चीखता है, 'चादर पर खून की एक बूंद तक नहीं है। यह पहले ही अपना मुंह काला कर चुकी है। मैं इसे पत्नी के तौर पर स्वीकार नहीं करुंगा।' इसके बाद लड़की को खंभे से बांधकर बेहोश हो जाने तक पीटा जाता है।

यह किसी गुजरे जमाने की नहीं बल्कि इसी 21वीं शताब्दी के भारत की तस्वीर है। महाराष्ट्र के कंजरभात समुदाय के लोग सदियों पुरानी इस वर्जिनिटी टेस्ट की परंपरा को आज भी फॉलो करते हैं। इसमें 'फेल' होने पर कपड़े उतारना, शरीर के अंगों को दागना, खौलते तेल में से सिक्का निकालना जैसे दंड दिए जाते हैं।

हालांकि अब विरोध के स्वर उठने लगे हैं और समुदाय के ही कुछ शिक्षित युवाओं ने इस अमानवीय और गलत परम्परा पर सवाल उठाए हैं। दो महीने पहले प्रियंका तमाईचेकर (26) और सिद्धांत इंद्रेकर (21) ने युवाओं में जागरुकता फैलाने और इस तरह के वर्जिनिटी टेस्ट पर नजर रखने के उद्देश्य से वॉट्सऐप ग्रुप बनाया है।

एक प्राइवेट कंपनी के साथ काम कर रहीं प्रियंका ने बताया कि उनके इस कदम का बहुत विरोध हो रहा है और पैरंट्स अपनी लड़कियों को वॉट्सऐप ग्रुप छोड़ने का दबाव बना रहे हैं। वहीं सिद्धांत ने बताया कि उन्होंने हाल ही में समुदाय के प्रमुख का एक विडियो रेकॉर्ड कर लिया जो ऐसे ही एक केस की 'सेटिंग' करने के लिए सौदेबाजी कर रहे थे। पुलिस के पास सबूत के साथ पहुंचने के बावजूद इसे 'आपसी सामाजिक कारण' करार देते हुए केस रजिस्टर करने से इनकार कर दिया गया।

कम उम्र में ही बच्चियों की शादी
दोनों ने बताया कि उनके इस कदम की वजह से उन्हें सोशल बायकॉट का सामना करना पड़ रहा है। समुदाय में पैरंट्स कम उम्र में ही बच्चियों की शादी करा दे रहे हैं। उन्हें डर रहता है कि देर होने पर कहीं वे किसी रिलेशन में ना पड़ जाएं।

हालांकि डॉक्टरों ने इस वर्जिनिटी परम्परा को गलत करार दिया है। उनके अनुसार हाइमेन का होना या फटा होना वर्जिनिटी का पैमाना नहीं है। खेलकूद में ऐक्टिव रहने वाली लड़कियों का हाइमेन कई बार फट चुका होता है और कई बार ऐसा भी होता है कि महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया हो और उसका हाइमेन यथास्थिति ही रहे।

Source : Agency