भोपाल 
“एकात्मकवाद को सम्पूर्ण भारत की जनता में फैलाने का श्रेय आदि गुरू शंकराचार्य को है। उन्होंने अत्यन्त विपरीत परिस्थितियों में पूरे देश में एकात्मवाद का प्रवर्तन किया। उनके सामने अत्यन्त प्रतिकूल परिस्थितियां थीं। इसके बावजूद भी सनातन धर्म और एकात्मवाद को भारत चारों दिशाओं में फैलाने का श्रेय शंकराचार्य को जाता है”। इस आशय के विचार आज रवीन्द्र भवन के मुक्ताकाश मंच पर आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में स्वामी सुखबोधानंद ने व्यक्त किये।

प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वामी सुखबोधानंद ने कहा कि शंकराचार्य ने लोगों को अहं का त्याग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यदि मनोस्थिति सकारात्मक हो तो व्यक्ति सभी प्रकार की विपरीत परिस्थतियों का सामना आसानी से कर सकता है। व्यक्ति रागद्धेश छोड़कर अपना कर्म करें तो आशानुरूप परिणाम मिलते हैं। शंकराचार्य के अद्धैतवाद से हमको यही सीख मिलती है। हमारे भीतर सृजनात्मक ऊर्जा है, उसको जगायें। सोच को बदलें, सितारे बदल जायेंगे। भावुकता से नहीं बल्कि आत्मस्थिति का आकलन कर निर्णय लेने की प्रेरणा शंकराचार्य से मिलती है। 

इस अवसर पर सुप्रसिद्ध नृत्यांगना सुसोनल मान सिंह ने कहा कि स्त्री सशक्तीकरण का बोध वाक्य हमारे प्राचीन ग्रंथों में हैं। अद्धैतवाद के प्रवर्तक शंकराचार्य ने भी सदैव स्त्रियों का सम्मान किया। उन्होंने ज्ञान योग को आत्मसात किया तथा समूचे भारत में उसका प्रचार प्रसार किया। शंकराचार्य ने मातृशक्ति का आदर करने की शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में हमें अपनी सोच बदलने की जरूरत है।

इसके पूर्व महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद ने अपने संबोधन में कहा कि शंकराचार्य ने भारत में एकात्मवाद को जीवंत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समूचे भारत की परिक्रमा कर अनेक विद्धानों से शास्त्रार्थ कर अद्धैत सिद्धांत स्थापित किया। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई एकात्म यात्रा को सामाजिक समरसता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया। 

प्रारंभ में खनिज विकास निगम के अध्यक्ष शिव चौबे ने एकात्म यात्रा के महत्व पर प्रकाश डाला। जन संवाद कार्यक्रम में संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव, संभागायुक्त अजात शत्रु श्रीवास्तव, जनप्रतिनिधियों सहित कालेजों के विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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